सात सुरों से बंधा ब्रम्हांड

  सा- सारे विश्व का ब्रहमा ने किया निर्माण रे-रेशम जैसे सुर मुरलीधर कृष्ण भगवान ग-गणेश जी की आरती पूजा सजाएँ म-माँ सरस्वती बजाए वीणा के मधुर स्वर प-प्रार्थना की शक्ति असीमित ध-धरती माँ का करो सम्मान नी-नियम से करो भगवान का...

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