खुशियाँ बनी बनाई नहीं मिलती

बस हमारी निकली ६ बजे सब रंगीन कपड़ो में सजे | गीत गाते हुए निकले हम पीछे छोड़े सारे गम | दोस्तों के साथ मारते किलकारी ताज़ा करते यादें सारी | फिर आ पहुंचे हमारे घर जिसका नाम था जवाहर| उस वातावरण ने हमें घेर लिया हमारी सारी थक्कान...

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