MYSTICAL ASTRONOMY

Astronomy is worth gazing ,

Through my telescope amazing ,

Oh ! heavenly celestial bodies I see ,

Some very far away , some close to me .

 

Universe made up of galaxies many ,

Black holes , Nebulae , The Big Bang Theory ,

Our Milky Way galaxy stands among them bright ,

The Solar System from which has its birthright .

 

The Sun , a hot ball of gases in the centre ,

Jupiter and Saturn the Solars mentor ,

We study meteors , asteroids and shooting stars ,

Constellations of various shapes ; 88 numbered jars .

 

Rotation and Revolution we know ,

Day and Night , Seasons , Waxing and Waning of the moon to glow,

Our Scientists send satellites in space ,

Moons , new planets , Saturn’s rings and stars they grace.

Pluto is not a planet any more ,

Neither a planet or satellite , just a folklore ,

It’s journey around the Sun is 248 earth years ,

A day on Pluto is 6 days and 8 hours , a very slow year .

 

Astronomers now exoplanets find ,

Exoplanets revolving around other stars and their kind ,

Liquid water in these stars is found ,

Life may exist then in new planets revolving them around .

 

Earth has oxygen , water and life ,

If no water , living a strife ,

The atmosphere keeps us nice and warm,

Renews  the ozone which keeps us away from harm .

 

Did you know India put 104 satellites in space ,

Puts a beaming smile on my face ,

I feel an Indian so proud ,

Astronomy is truly fascinating , I say aloud !

 

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      Swaraj Palkar

      Std : 8 B

      Arya Vidya Mandir Bandra West  

मेरी यात्रा का वर्णन

मेरे विद्यालय मे हर वर्ष बैसाख के महीने में ग्रीष्मवकाश होता है और इस वर्ष भी था,बहुत  साल तक मेरा परिवार और मैंने कई ऐशियन देश घूमें  है और  एशिया के कई देशों की यादें भी हमारे पास हैl इसलिए इस वर्ष हम पूरबी  यूरोप मै ;हंगरी, ऑस्ट्रिया और चेक रिपब्लिक के पर्यटन पर निकलेl यूरोप हम पहले भी जा चुके हैं और वहां के रहन-सहन का हमें स्मरण है क्योंकि एशिया के देशों का रहने का ढंग यूरोप के देशों से बहुत अलग है, इसलिए हम पूरी तैयारी के साथ गएl हमारी हवाई यात्रा थी वह भी मुंबई से नहीं, दिल्ली से पर दिल्ली जाने से पहले हम अपने गृहनिवास लखनऊ गए मेरी दादी जी और बुआ से मिलने फिर हम दिल्ली मेरे चाचा जी के घर पहुंचे थोड़ा विश्राम करने के लिए क्योंकि हमारी हवाई यात्रा रात के तीन बजे थीl हम  ढाई बजे दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचेl हमें तुर्की कि राजधानी इस्तांबुल से होकर जाना था, हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंचने के लिए और हम बारह घंटे के अंतराल में  बुडापेस्ट पहुंचे और विश्राम कर बुडापेस्ट की सैर करने निकलेl हंगरी के बाद हम ऑस्ट्रिया  गए, वह भी ट्रेन से, जिस मे हमें यूरोप की खूबसूरती को पास से देखने का मौका मिला l अंत मै हम चेक रिपब्लिक पहुंचे और वहां भी ट्रैन से ,सच में  वहां का नज़ारा काबिलेतारीफ था. चेक रिपब्लिक की राजधानी प्राग में हमे बहुत आनंद आया वहां हमने  प्राग कैसल देखा जो बहुत मशहूर था और वहां के सबसे पुराना पुल चार्ल्स ब्रिज को भी देखाl हम वापस आये इंस्तांबुल से होकर ही क्योंकि हमारा विमान वहीँ  से बदलने वाला था l मेरी यह यात्रा सुखद थी  क्योंकि मुझे अलग-अलग देशों के बारे में जाने का अवसर मिला और वहां पे रह कर उन्हें समझने का भी l

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विरल वत्सल

९-स

आर्य विद्या मंदिर बांद्रा(पश्चिम)