खुशी  हमारे आत्म पर निर्भर करती  है
ज़िन्दगी है छोटी हर पल में खुश हूँ ।
काम में खुश हूँ , आराम में खुश हूँ ।
आज पनीर नहीं , दाल में खुश हूँ ।
आज गाड़ी नहीं , पैदल ही खुश हूँ ।
आज कोई नाराज़ है , उसके इस अंदाज से ही खुश हूँ ।
जिसको देख नहीं  सकता, उसकी आवाज़ से ही खुश हूँ ।
जिसको पा नहीं  सकता  , उसको सोच कर ही खुश हूँ ।
बीता हुआ कल जा चुका है, उसकी मीठी याद में ही खुश हूँ ।
आने वाले  कल का पता नहीं , इंतज़ार में ही खुश हूँ ।
हँसता हुआ बीत रहा है पल, आज में ही खुश हूँ ।
ज़िंदगी है  छोटी, हर पल में खुश हूँ ।
अगर दिल को छुआ, तो जवाब देना वरना बिना जवाब के भी खुश हूँ ।
श्वेनी  शेट्टी
तीसरी – क
आर्य विद्या  मंदिर , बांद्रा ( पूर्व )