जब भी संभव हो सदा हँसों ।
हर मनुष्य को अपना जीवन प्यारा होता है । सब अपने जीवन में कुछ अच्छा करना चाहता है । भोजन , वस्त्र की तरह जीवन में एक और वस्तु की नितान्त आव्श्य्कता है – और वह है प्रसन्न रहना ।
सर्वदा चिन्ता ग्रस्त रहने से नीरस और दूःखद बन जाता है । जीवन में नए स्फ़ूर्ति और उत्साह लाने के लिए
मनुष्य को हमेशा प्रसन्नचित रहना चाहिए ।

हमारे शरीर का महत्वपूर्ण भाग है हमारा मन-मस्तिष्क । अगर हम सदैव चिन्ता मे व्यर्थ रहेंगे तो हमे नये
भावनाए नही मिलेंगे । आगे बढ़ने का उपाय भी समझ नही आएगा। चारों ओर अंधेरा दिखाई देता है। हम अपने आप को अकेला महसूस करते है और हमारा कार्य करने का उत्साह भी कम हो जाता है । उससे हमारे शरीर के उपर कु-प्रभाव पडता है । जिससे बहुत सारी बीमारियाँ हमे जकड लेती है । फ़िर हम सोचते है कि यह सब क्यों हुआ ?