मिल बाँटकर रहने का मतलब है कि सभी के साथ अच्छा व्यवहार करना, सबके साथ मिल जुलकर रहना और अपनी वस्तुओं को एक दूसरे के साथ बाँटना। हमें दूसरों की मदद करनी चाहिए। जैसे कि हमारे  विद्यालय आर्य समाज का नियम भी है कि हमें खुद की उन्नति में संतुष्ट नहीं रहना चाहिए किंतु सबकी उन्नति में ही अपनी उन्नति समझनी चाहिए। इसी तरह हमारा भी यही मुख्य उद्देश्य होना चाहिए । यदि हम सबके साथ मिल जुलकर रहें ,तो दूसरे भी हमारी मदद करेंगे। हमें प्रेम, सम्मान आदि मिलेगा ।मिलकर रहने से खुशियाँ बढ़ती है। यदि हम जरूरतमंदों को उनकी जरूरत पूरा करने में उनकी सहायता करते हैं तो हमें शुभकामनाएँ मिलती हैं और सुख की अनुभूति होती है। मिल बाँटकर रहने से प्रेम, संतुष्टि, सद्भाव ,भाईचारा आदि भावों की उत्पत्ति भी होती है। साथ ही साथ हमारा व्यक्तित्व का विकास भी होता है जिससे सही अर्थों में हमें सच्चे सुख की अनुभूति होती है।

अरहम संघवी

छठी ब

आर्य विद्या मन्दिर ( बांद्रा पूर्व)

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