सूरज ऊर्जा और उसी के साथ हम लोग भी हमारी श्रीनगर की शीकारा
से हमारी गाडी में बैंठे। सुबह का समय था हमने सोचा चामुंडा माता के
दर्शन हो जाँयगे तो दिन बहुत अच्छा गुजरेगा। दर्शन होते ही हम
श्रीनगर से पहलगाम के लिए रवाना हो गए।रास्ते में हम पाँच -मेरे
माता पिता, दो बहनें और मैं, हम गाने गाते हुएँ जा रहे थे। हमें पता
भी नहीं चला और दो घंटों का रासता जैसे दो मिनट में खतम हो गया।

पहलगाम पहुँचते ही हम हमारी हॉटेल में पहुँचे। वहाँ हमने खाना
खाया और फिर हम घोडा गाडी के लिए पहाँड पर जाने वाले थे।घोडे
वाले ने बताया कि अब हम ऊपर जाते हुए हम सात नजारे देखने वाले
है। जब मैंने देखा कि एक व्यक्ति का घोडा खुड पक्के रास्ते से कच्चे रास्ते
पर चलागया तब मुझे बहुत डर लगा। मैं बहुत चिल्लाया पर फिर जैसे
हम आगे बदने लगे वेसै ही मुझे मजा आने लगा।
वह सात नजारे देखते हुए मेरा मुहँ खुला का खुला रह गया।
मुझे लगा कि यह दुनियाँ की लीला भी भगवान ने कया रची
है। फिर ऊपर पहुँचते-पहुँचते हम मिनी स्विट्जरलैंड भी गए।
फिर हम बहुत जल्दी नीचे पहुँचगए।वहाँ एक लिडर नामित नदी
है। इन घंटों में, मेरी मेरे घोड़े के साथ दोस्ती हो गया थी, इसीलिए मैं
अपने परिवार के साथ उसे पानी पीने के लिए ले गया।
उसके बाद हम पांच पहलगाम के बाजार में घूमने गए। वहां का बाजार
बहुत अच्छा था। उस बाजार में सभी प्रकार की

दुकानें थीं । हम लोगों ने मेरी मां के लिए एक रंगीन साड़ी खरीदी ।
दुकानदार ने हमें बताया कि कश्मीर खतरनाक नहीं है और देर रात तक
बाजार में रोशनी रेहती है । उस ठंड के मौसम में हमने एक आइसक्रीम
खाई और हमारे होटल में वापस चले गए । हमने अपना पेट भरकर
खाना खाया।
स्वादिष्ट भोजन खाने के बाद पूरे दिन की थकावट निकल गई थी। हमने
स्थानीय लोगों का पसंदीदा सेवैया का हलवा खाया । फिर से सब में
वापस जोश आया, इसलिए सब ने सोचा कि नीचे बगीचे की शीतल
हावा में बैठे। वहाँ बहुत मजा आया। फिर जाकर आराम किया इस
तरह मेरी यह याञा रोमांचक और यादगार रही।

नाम- जयेंद्र मंगल
कक्षा- 7th B
आर्य विद्या मंदिर, बंदरा पूर्व