हर एक बूँद कीमती है।

जल, पृथ्वी पर है सबसे अनमोल रत्न

इसके बगैर कुछ नहीं कर सकते यत्न

सब कुछ करता, सब कुछ भरता

धरती पर जीवन इसी से चलता

अब इसका कर रहे दुरुपयोग

जिसके कारण जग रहे है, कई नए रोग

धरती के नीचे से खींच रहें है अंधाधुँध पानी,

व्यर्थ न फेंके जल की एक भी बूँद

सुधारे गलती व अपनी भूल

हम न सुधरे या न सुधरे समाज

तो प्यासे ही गँवाएगे अपनी जान

करें प्रतिज्ञा व्यर्थ न करेंगे जल की एक बूँद!