स्मृतियाँ हमारे जीवन में सबसे बड़ी भूमिका निभाती हैं जो हमें अपने अतीत में फिर से जीने के लिए आग्रह करती हैं।इसी के साथ मैं अपने बचपन की एक सुखद स्मृति बाँटना चाहती हूँ। जब मैं छोटी थी, तब मैं हर रोज़ अपनी नानी के घर अपने छोटे भाkkkkkई के साथ खेलने जाती थी।तब कोई पढ़ाई का बोझ न था। वहाँ हम दोस्तों के साथ खेलते और खूब मस्ती करते। छुट्टियों के दिन देर से सोते और देर से उठते। फिर एक रात हमने फ़ैसला लिया कि हर छुट्टी की रात, हम कुछ नया और मज़ेदार करेंगे। उसके बाद धीरे-धीरे हम बाहर जाने लगे। कभी-कभी हम बाहर से ‘चोको बार’ की  आइस-क्रीम मँगाते या ठंडी हवा का मज़ा उठाकर बग़ीचे में टहलते। इसे हम “नाइट वॉक” बुलाने लगे।एक रात हमारे दोस्त के मामाजी ने हमें उनकी बड़ी गाड़ी में घुमाने के लिए ले गए।हम सब जाने के लिए बहुत उत्साहित थे। हम देर रात को अपने रात के कपड़ो में नीचे उतरकर जल्दी से गाड़ी में बैठ गए।जैसे ही मामाजी ने गाड़ी चलाना शुरू कर दिया
हमने खिड़की के काँचों को नीचे किया और हम ज़ोर ज़ोर से गाना गाने लगे। उसके बाद हम बहुत मज़ाक़ करने लगे और पागलों की तरह अपने नाक से जान बूझकर हँसने लगे।लौटने के बाद हम सीधा घर गए।मैंने कभी पहले इतना मज़ा नहीं किया जितना मैंने उस रात किया।काश मैं फिर से “नाइट वॉक” के लिए जा सकूँ।
– प्रिशा पंजवानी
कक्षा- आठवीं ‘अ’
आर्य विद्या मंदिर बांद्रा (पश्चिम)