अशोक इतिहास के सबसे महान राजाओं में से एक माने जाते हैं| वह कई कार्यों के लिए प्रसिद्ध थे, एवं उनका व्यवहार उनमें से एक है| परन्तु वे सदैव ऐसे नहीं थे|

अशोक पहले बहुत महत्त्वाकांक्षी एवं क्रूर थें| वे केवल राज्य की सीमा-वृद्धि का विचार करते थें, उस प्रयास में एक मारा जाए या हज़ार मारें जाए, वे उससे हटते नहीं थें|

लेकिन उनके जीवन में एक ऐसी घटना हुई, कि उनका पूरा स्वभाव बदल गया| कलिंग राज्य एक ऐसा राज्य था जो मौर्य साम्राज्य में नहीं था| कलिंग राज्य पर सत्ता प्राप्त करने के लिए बेचैन थे, और वह उस राज्य को पाने के लिए कुछ भी करना चाहतें थे|

उन्होंने कलिंग पर आक्रमण कर दिया| उस राज्य को तो उन्होंने जीत लिया, परन्तु जो अशोक ने उस युद्ध में जो देखा, उनकी दुनिया बदल गई| उस युद्ध में हज़ारों लोग मारे गए, जिसमें शत्रु सैन्य और अशोक के सिपाही भी समाविष्ट थें| अशोक आखिरकार समझ गए कि उनके स्वार्थ के कारण कई जनों को अपने प्राणों से हाथ धोने पड़े, जो कदापि उचित नहीं था| इस बात को समझकर उन्होंने स्वपरिवर्तन किया|

अशोक गौतम बुद्ध के अनुयायी बन गए और वे बुद्ध के प्रदर्शित अहिंसा के मार्ग पर चलने लगें| उन्होंने लोगों के प्रति सहानुभूति की भावना रखी एवं अपना राज्य त्यागकर जनकल्याण में लग गए|उन्होंने हर स्थान पर बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार किया और अपने राज्य के निवासियों के लिए अनेक सुख-सुविधा के साधन बनवाएँ | उन्होंने अपने राज्य का बहुत कल्याण किया और राज्य में सुख, शान्ति एवं समृद्धि फैल गई|

कलिंग राज्य ने अशोक के नेत्र खोल दिए| वह समझ गए कि रक्तपात से कुछ साध्य नहीं होने वाला था, एवं उनका मन उन्होंने सत्कर्मों की ओर मोड़ लिया| भारत के हर राजा के बीच, अशोक सम्राट का नाम सितारे की तरह चमकता है|

 

शिवाली यादव

कक्षा 7C

AVM JUHU