विज्ञान – वास्तविकता का प्रतिबिंब

भारत अपनी विविधता के लिए जाना है और इस विविधता से उत्पन्न होते है होते है हजारों अंधविश्र्वास। किन्तु हम समझ नहीं पाते कि इन अंधविश्र्वासों का रहस्यमय सत्य विज्ञान में ही छिपा हुआ है।

हमें विधालय में सिखाया जाता है कि हिंदु संस्कृति का अहम् हिस्सा है एक दूरे को , हाथ जोड़कर नमस्कार करना। नमस्ते का अर्थ है मेरी आत्मा आपकी आत्मा का आदर करती है। किन्तु. वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो जब हम अपनी हथेलियाँ जोड़ते हैं तब हमार उंगलियों की युक्त्तियाँ भी जुड़ जाती हैं।  युक्त्तियाँ वास्तव में आँखों, कानों और दिमाग के दबाव बिंदु हैं। इन्हें दबाकर, हम उस व्यक्ति को लंबे समय तक याद रख सकते हैं।

हम छोटी लड़कियों को हमेशा चांदी के अंगूठे के छल्ले पहनने से रोका जाता है और कहा जाता है कि हम उन्हें विवाह के बाद पहन सकते हैं। इसका रहस्य भी विज्ञान से ही समझा सकता है। छल्ला हमेशा पैर की दूसरे उंगुली में पहना जाता है, क्योंकि उस उंगली की एक तंत्रिका गर्भाशय(uterus) से होकर दिल से जुड़ती है। चांदी की अंगूठी पहने से मासिक धर्म चक्र (menstrual cycle) सुचारू रूप से चलता है और गर्भाशय को स्वस्थ और मज़बूत रखता है।

हमारे बुजुर्ग हम से कहा करते हैं कि कोई भी शुभ कार्य करने से पहले दही-शक्कर खाना सौभाग्य प्राप्त करवाता है। वे ऐसा कहते हैं क्योंकि दही का सेवन हमारे पेट पर शीतल प्रभाव डालता है एवं चीनी हमे तुरंत ग्लूकोज प्रदान करती है जिससे बदन मे शक्ति आती है।

SIYA JUMANI

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