ज़िन्दगी में मनुष्य देने से गरीब नहीं होता ” यह महान शब्द मदर टेरेसा ने कहे थे।  वह सच में इन शब्दों को सिद्ध करती थी। उन्हें गरीबों के साथ मिल बांटकर रहने में सच्चे सुख की अनुभूति प्राप्त होती थी।  उनकी जैसी नायिका को हम सभी को सलाम करना चाहिए और उनके दिखाए मार्ग पर चलना चाहिए क्योंकि उनका भी यही मानना था की हर एक जीवधारी को उनकी तरह सच्चे सुख का अनुभव करना चाहिए। 
छोटी-छोटी चीज़ें जैसे सुबह उठकर कबूतरों को दाना देना, भूखों को खाना देना और उनकी ज़रूरत की चीज़े उन्हें देना। गरीबों के बच्चो को पढ़ाना। जैसे भगवान ने हम जैसे कुछ लोगों को आरामदायक जीवन दिया है, हमें उसे मिल-बांटकर गुज़ारना चाहिए। प्रत्येक को अपनी ही उन्नति में संतुष्ट नहीं रहना चाहिए किन्तु सबकी उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिए। 
अंत में मैं यह कहना चाहूँगी कि मन की सच्ची शांति, सुख और समृद्धि के लिए हमें मिल-बांटकर रहना चाहिए। व्यथा में, बुरी परिस्थिति में मिल बांटकर रहने में ही सच्चे सुख की अनुभूति है । 

मन्नत देसाई  कक्षा: १० ब   AVM JUHU