एक कदम बढ़ाओ

कदम किसी कमज़ोर की तरफ  उसे परेशान करने के लिए नहीं !

उसकी मदद के लिए उसे सहारा देने के लिए।

कभी हाथ तो बढ़ाओ , किसी की जेब  काटने के लिए नहीं !

किसी की कोई चीज़ लौटाने के लिए , किसी को ये बताने के लिए कि दुनिया आज भी सच्चे लोगों से भरी है।

कभी आवाज़ तो लगाओ , किसी को खरीदने के लिए नहीं!

किसी की मदद के लिए आवाज़ लगाओ ,  एक अन्याय के खिलाफ ! क्यों बाद में पछताते हो ,

क्यों पहले शोर नहीं करते !

वो मोमबतियाँ जो एक घटना के बाद जलती हैं , क्यों किसी के लिए पहले नहीं जल जातीं !!

क्यों कोई हिम्मत नहीं कर पाता , किसी पर होते हुए अत्याचार को ही देखता है।

तुम कल भी चुप थे जब कोई रो रहा था , तड़प रहा था कोई , तुम आज भी चुप हो जब कोई बहुत दूर जा चूका है फर्क बस  इतना है कि पहले की चुप्पी बुज़दिली की थी और आज उसी चुप्पी ने मौन या शोक का नाम ले लिया हैं।

 एक कदम उठाओ किसी की मदद के लिए उस दिन तुम जीत जाओ , उस दिन इंसानियत  जीत जाएगी।

सब जीत जाएँगे और सच्च बोलूँ तो उससे सच्ची अनुभूति कोई भी नहीं हो सकती।

इस कविता के माध्यम से मैं यह कहना चाहती हूँ कि एक दूसरे की मदद करने में ही सच्चे सुख की अनुभूति है। मदद करने से सच्चा सुख मिलता है और मिलजुलकर रहने में । जैसे लोग ही लोगों के काम आते हैं यह जैसे रमज़ान रसीला के काम आया था और सच्चे दोस्त एक दूसरे के काम आते हैं इसलिए दोस्त बनाओ और मिल- बांटकर जियो। यह दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे।

 ब्रह्मपरी चौहान कक्षा १० ए AVM JUHU