किसी महान व्यक्ति ने कहा है कि, वे व्यक्ति असाधारण होता है जो दुनिया भर में भ्रमण करता है।छोटी छोटी जगहों पर घूमकर हम बड़े बड़े अनुभव ले सकते हैं ।
एक ही स्थान पर सीमित रह कर हमारी मानसिक परिस्थिति का विकास असंभव है।दुनिया भर में सैंकड़ों अलग देश हैं,संस्कृतियाँ हैं ,प्रांत हैं ,धर्म हैं और भिन्न भिन्न प्राकृतिक नज़ारे हैं। इन सब से परिचित होकर व्यक्ति की मानसिक सीमाएँ खुल जाती हैं।
भ्रमण करते हुए हम नए लोगों से मिलते हैं ,नई वेष भूषाओं को देखते हैं,अलग प्रकार के भोजन खाते हैं । इतना ही नहीं हर -अलग स्थान पर हमें अलग प्रकार के जीव जंतु ,पशु-पक्षी ,खेत खलयानऔर अलग मौसम मिलते हैं ।
मैं अपने माता पिता के साथ बचपन से ही बहुत सारी जगह घूमने जाता हूँ । मैंने कभी रेगिस्तान देखा तो कभी बर्फ़ीले पहाड़, कभी दुबई के बुर्ज ख़लीफ़ा पर गया तो कभी होंगकोंग के डिज़नीलैंड। मैंने बहुत सारी जगह देखी हैं। जब भी मैं एक  नई जगह जाता हूँ तो मैं वहाँ के बारे में बहुत सारी चीज़ें  सीखकर आता हूँ।
मेरे और मेरे परिवार की यह भ्रमण लालसा कभी तृप्त नहीं हो सकती है क्योंकि अनुभवों की किताब में नए पृष्ठ जुड़ते जाते हैं ।
Pratham Kulshreshtha
Class 5 A
Roll no. 27