सन सन करती बही पुरवाई
कल कल बहती नदिया की धारा
झर झर गिरते झरने मानो दरिया ने इन्हें पुकारा
टप टप बूँदों की सरगम मे मचलता है जग सारा
झूम उठे नीम-अमराई मानो छेड़ दिया हो गीत कोई प्यारा
मन का मयूर नाचे जब जब
प्रकृति छेड़े मल्हार और सुरीले
सुर में पपीहा पुकारा

अंशिता सिंह
कक्षा तीसरी ब