भारत मे हर पर्व किसी न किसी वैगानिक मान्यता पर आधारित होता है।हर पर्व के पीछे कोई न कोई घटना जुडी होती है जो हमें अपने गौरव पूर्ण अतीत का स्मरण कराती है। दीपावली से पूर्व धनतेरस का पर्व आता है इस दिन लोग नए पात्र खरीदते हैं।इसके पीछे मान्यता यह है कि सुरासुर युद्ध मे जब तेरह रत्न निकाले जा चुके थे तब चौदहवां अमृत कलश लेकर स्वयं धनवंतरि प्रकट हुए थे ।
इसलिये इस पर्व को धनवंतरि त्रयोदशी भी कहा जाता है।इस कहानी मे धनवंतरि जैसे आयुर्वेदाचार्य का प्रसंग जुडना उनकी विद्ववत्ता और आयुर्वेद मे उनकी महान प्रवीणता की महत्ता को सिद्ध करता है।
निरोगी  स्वस्थ्य रहना हर व्यक्ति की इच्छा होती है जिसे अमृत कलश ही पूर्ण करता है।शायद इसी लिए यह मिथक इस प्रकरण से जुड़ा।ऐसी भी मान्यता है कि त्रयोदशी के दिन ऋषि धनवंतरि अपना जन्मदिन मनाते हुए लोगों को मुफ्त औषधियाँ वितरित करते थे।लोग औषधि लेने नए पात्र लेकर ही आते थे। इसी से इस पावन पर्व पर नए पात्र (बरतन) खरीदने की परंपरा विकसित हो गई।

नाम- प्रणीति खुराना
आठवीं – स
आर्य विद्या मंदिर विद्यालय बान्द्रा पूर्व