नारी तू हर तरह से हारी है,

कभी दुर्बलता से, कभी स्नेह से,

कभी ममता से, कभी स्पर्श से,

कभी भावना से, कभी एहसास से,

नारी तू हर तरह से हारी है ||१||

 

कहने को तू स्नेह की मूरत है,

तू ही देवी तू ही माँ काली है,

परन्तु हकीकत यही सचवाली है,

कि आँचल में दूध, आँखों में पानी है,

नारी तू हर तरह से हारी है ||२||

 

अपमान कर अस्मिता को छीना जिसने,

उन्हें गर्व है अपने पौरुष पे,

आज फिर उसने नारीत्व को

अपने पैरों तले रौंदा है,

जिस गर्भ से जन्म लिया

उसे ही उसने लज्जित किया ||३||

 

इस सोच से बहुत परे है,

आज फिर किसी माँ को शर्मिंदा

किया तुमने जन्म लेकर है,

नारी तू हर तरह से हारी है ||४||

भव्या मिश्रा

कक्षा 8-A

AVM JUHU