किसी काम को करने की मन में  ठान लो तो रास्ता भी निकल ही आता हैं।  इच्छा  एक ऐसी मानसिक शक्ति है जिस से एक व्यक्ति हिमालय पार कर सकता  है। मनुष्य की प्रबल इच्छा में  सबसे ज्यादा शक्ति होती है।  जब मनुष्य की चाह यानि कि उसकी इच्छा उसका मजबूत इरादा बन जाती है तो उसे अपनी मंज़िल तक पहुँचने की राह मिल ही जाती है।

     यह प्राचीन कहावत “जहाँ चाह  वहां राह  ”  बहुत समय से चलती  आ रहा है और सिद्ध भी हुई है।  हर व्यक्ति को न सिर्फ इच्छा  रखना चाहिए बल्कि उसे अपना ढृढ़ संकल्प बनाना  चाहिए।  जिस व्यक्ति की इच्छा  गहरी व  महान  होती  है   उसे रास्ता मिलता है व  उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है।  हम सब को भी इस कहावत का अर्थ समझ , पालन करना चाहिए।

    अगर वाकई में हम किसी चीज़ को पाने की की चाह हो तो आप अपने सपनों को साकार करने की शक्ति रखते हैं।  चाह के साथ आपको कुछ कर दिखने का जज़्बा भी चाहिए। अगर आपके पास यह दोनों हैं आपके लक्ष्य की बाधा कोई भी नहीं बन सकता और आपको आपके लक्ष्य प्राप्त करने से कोई रोक नहीं सकता।  

मनुष्यों के अंदर जो मन होता है उसी को मानने से आप अपने सपने को साकार कर सकते हैं।

     इसका उदाहरण हम डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम से ले सकते हैं। डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जो हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति थे, वह एक बेहद गरीब परिवार से थे, ज़िन्दगी में उन्होंने इतना बड़ा सफर तय करने के लिए बहुत सारी मुश्किलों का सामना किया है। अपने जीवन में अखबार भी बेचे हैं। उनकी चाहत अपने देश के लिए कुछ अच्छा वह महान करने की थी। यहाँ तक पहुँचने में उनको अपनी चाह पूरी करने में बहुत सी बाधाओं का सामना पड़ा लेकिन उन्होंने अपनी चाहत के दम पर सफलता प्राप्त की।

     इसके बारे में हम थॉमस एडिसन से भी सीख सकते हैं। थॉमस एडिसन को कम दिमाग की वजह से विद्यालय से निकाला गया था। परन्तु उन्होंने अपनी पूरी लगन और मेहनत से और लगातार की हुई वह परिश्रम से दुनिया में एक पहचान बनाई और बल्ब आविष्कार भी किया। जब वह बल्ब का अविष्कार करने जा रहे थे तब लोगों ने उनका का मज़ाक उड़ाया था लेकिन लगातार प्रयास और मेहनत से उनको अपनी मंज़िल प्राप्त हुई और सफल हुए।

     इसलिए कहते हैं ”जहाँ चाह वहाँ राह ”। दुनिया में ऐसे कई नाम मिलेंगे जिन्होंने अपने लगन और मेहनत के साथ महान कार्य अकेले ही कर गए। इतिहास में उनका नाम हमेशा वर्णित रहेगा। इन्होंने अपने मन में जो ठान लिया था उसके लिए दिन रात एक कर दिया। ऐसे लोग मन के साफ़ और लोगों का आदर करने वाले होते हैं। इसलिए दुनिया उनका सम्मान करती हैं और करती रहेगी।

     हमें इन महान पुरुषों से यह सीख कर अपने कर्म करने चाहिए और उसका परिणाम आपको आपके सफलता के अनुसार मिलेगा। ये लोग पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन जाते हैं और अगर हमें उनकी  तरह बनना हैं तो हमें असफलता की सीख मानकर आगे बढ़ना चाहिए और हमारे लिए राह खुद बनती जाएगी।

धन्यवाद।

अंकिता पटनायक

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आर्य विद्या मंदिर जुहू।