जब में संगीत और पौराणिक कथा के बारे में सोचता हूँ, तब मुझे सबसे पहले कृष्ण और उन्की बांसुरी की याद

आती हैं| उन्की बांसुरी के स्वर से सभी पशु- पक्षी, गोपियाँ आकर्षित हो कर तल्लीन हो जाते थे| एक दिन में

अपने खयालो में खोया था जब मेरे मन में यह ख्याल आया की भगवन कृष्ण को यह बाँसुरी किसने दी? फिर मैंने

थोड़ी छान भीन करी तब मुझे बांसुरी के पीछे छुपा पूरा रहस्य पता चला|

हर रोज़ कृष्ण बगीचे में जाकर सभी पौधों से कहते थे, “मैं तुमसे प्रेम करता हूँ|” यह सुनकर सभी पौधे अत्यधिक

प्रसन्न होते थे और जवाब में वे कृष्ण से कहते थे, “कृष्ण, हम भी आपसे प्रेम करते हैं|”

एक दिन अचानक तेज़ी से दौड़ते हुए कृष्ण बगीचे में आए और सीधे बांस के वृक्ष के पास गए|

वृक्ष ने कृष्ण से पूछा, “कृष्ण, क्या बात है?”

कृष्ण ने कहा, “मुझे तुमसे कुछ पूछना है|”

बांस ने कहा, “आप मुझे बताइए. यदि संभव होगा तो मैं अवश्य आपकी सहायता करूँगा|”

इस पर कृष्ण बोले, “मुझे तुम्हारा जीवन चाहिए. मैं तुम्हें काटना चाहता हूँ|”

बांस ने क्षणभर के लिए सोचा और फिर बोला, “क्या दूसरा कोई रास्ता नहीं है?”

कृष्ण बोले, “नहीं, बस यही एक रास्ता है|”

बांस ने कहा, “ठीक है, मैं स्वयं को आपको समर्पित करता हूँ|”

जब कृष्ण बांस को काटकर उसमें छेद कर रहे थे तब बांस दर्द से चिल्ला रहा था क्योंकि छेद बनाने से बांस को

बहुत पीड़ा हो रही थी| परन्तु काटने व तराशने वाली पीड़ा और दर्द को सहने के बाद, बांस ने स्वयं को एक

मनमोहक बांसुरी में रूप में पाया| यह बांसुरी हर समय कृष्ण के साथ रहती थी|

इस बांसुरी से गोपियाँ भी ईर्ष्या करती थीं| उन्होंने बांसुरी से कहा, “अरे, कृष्ण हैं तो हमारे भगवान पर फिर भी

हमें उनके साथ केवल कुछ समय ही व्यतीत करने को मिलता है| वह तुम्हारे साथ ही सोते हैं और तुम्हारे साथ ही

उठते हैं| तुम हर समय उनके साथ रहती हो|” एक दिन उन्होंने बांसुरी से पूछा, “हमें इसका रहस्य बताओ| क्या

कारण है कि भगवान कृष्ण तुम्हें इतना संजोकर रखते हैं?”

बांसुरी ने उत्तर दिया, “इसका रहस्य यह है कि मैं अंदर से खोखली हूँ. और मेरा अपना कोई अस्तित्व नहीं है|”

सही मायने में आत्मसमर्पण इसी को कहते हैं: जहाँ भगवान आपके साथ जैसा वह चाहें, वैसा कर सकते हैं| इसके

लिए आपको डरने की ज़रुरत नहीं है | हमें अपना सर्वश्रेष्ठ करने के बाद शेष सब प्रभु पर छोड़ देना चाहिए| जब

हम स्वयं को सम्पूर्ण रूप से ईश्वर के चरणों में समर्पित करते हैं तो प्रभु हमारे भले का उत्तरदायित्व अपने हाथ में

ले लेते हैं और हमें सदा सर्वश्रेष्ठ ही मिलता है|

बांसुरी ने हमे कितनी सच्ची और बड़ी बात सीखा दी हैं| बांसुरी से हमे संगीत मिलता हैं और संगीत से बांसुरी

को एक नयी पेहचान|

क्या आपको यह कहानी पसंद आयी? आप यह तो समझ ही गए होंगे की संगीत हमारे मन को ही नहीं ईश्वर के

मन को भी भाता हैं| हमे संगीत को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाके रखना चाहिए|

धन्यवाद्|

अक्युत सराफ

कक्षा पांच ए