सही मायने में अनुभव जीवन का सबसे बड़ा एवं अचछा शिक्षक है। पुस्तक हमें विद्या देती हैं परन्तु अनुभव हमारा मार्गदर्शन करता है। पुस्तक की विद्या हमें थोड़े समय या कुछ दिनों में भूल सकते हैं परन्तु जो हम अनुभव करते उसे हम कभी नहीं भूल पाएँगे। अनुभव करने से हमारी ज्ञान की वृद्धि भी होती है। ज्ञान प्राप्त करने के लिए केवल पुस्तक विद्या सहायक नहीं है हमें विद्या से जुड़ी अलग-अलग प्रत्योगिता में भाग लेना चाहिए,इससे अनुभव कर हम नयी-नयी चीज़े सीखते हैं।

अनुभव हमेशा अच्छा नहीं होता  कई बार बुरा भी होता है जिन्हे हम भूलना चाहते है परन्तु हर परिस्थिति से हम कुछ सीख मिलती है लेकिन हमें उसे समझना पड़ता है। हम अनुभव बहुत से किस्सों से करते हैं कुछ हार के या अववल आने के लिए की गयी मेहनत के। हर जीत के पहले लोग हारना भी अनुभव करते हैं जैसे हमें किसी विषय मैं कम अंक मिले और हम दुखी हो गए लेकिन अगर हम हार मान जाए तो अगली बार भी उतने ही अंक प्राप्त होएंगे। लेकिन अगर हम अपने अनुभव से कुछ सीखे और अगली बार वही गलती न दोहराहे  तब हमें अच्छे अंक प्राप्त हो सकते हैं। हमारे देश भारत को भी आज़ाद होने के लिए २०० वर्ष लगे थे। इस समय भारत के वीर बार-बार हार अनुभव कर चुके परन्तु उससे सीख लेकर उन्होंने विजय प्राप्त की। वे असफल होने पर भी हार न माने और हमारे देश को आज़ादी दिलाई।

अनुभव हमें प्रेरणा देता है की हम हार न माने और हमारी गलतिया सुधार  कर सफलता प्राप्त करे। बहुत महान  लोगो ने हार का डटकर सामना किया और अपने कार्य  से बहुत अनुभव प्राप्त किया जिससे उन्हें सफलता प्राप्त हुयी। बुरे अनुभव की गहराई में देखा जाये तो उनमे बी एक सीख छिपी  हुई होती हैं और वह सीख प्रपात कर हमें आगे बढ़ना चाहिए।

एक अनुभवी व्यक्ति १०० ज्ञानी व्यक्तियों के साम्मान होता हैं। हमें हर अनुभव से सीखकर ज़िन्दगी में आगे बढ़ना चाहिए और हमारा लक्ष हम आसानी से हासिल कर पाएँगे। मेहनती व्यक्ति हमेशा अनुभव को प्रेरणा मानकर सफलता प्राप्त करते हैं। हमें भी अनुभव को प्रेरणा मानकर उससे कुछ सीखना चाहिए और सीख से ज़िन्दगी में सफलता प्राप्त करनी चाहिए तथा समाज के लिए प्रेरणा बनना चाहिए।          

                                           – By अंकिता पटनायक 8B AVM JUHU