जीवन में अनेक स्मृतियाँ होती हैं जो कभी दुखद तो कभी सुखद होती हैं।  जीवन में कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं जो हमारा जीवन परिवर्तित कर देती हैं। कई बार कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं जिनकी शुरुआत बाधाओं से होती लेकिन अंत में सब कुछ एकदम ठीक हो जाता हैं।

मैं अपनी कक्षा में सबसे अच्छा पढ़ने वाला विद्यार्थी था| मैं हर विषय में सबसे ज़्यादा अंक लाता था | मन ही मन मैंने एक दिन सोचा कि मैं पूरी कक्षा में प्रथम स्थान पर आता था, तो दो०-तीन महीने पहले पढाई शुरू करने की क्या ज़रुरत थी? इस बार मैं दस-पंद्रह दिन पहले शुरू करूँगा | मेरे माता-पिता मुझे पर हर दिन पढाई करने के लिए ज़ोर डालते थे | पर मेरे कान पर जूँ न रेंगी | परीक्षा के लिए पंद्रह रह गए थे | मैंने वह दिन से पढ़ाई शरू की; मैंने सोचे की मैं इतने दिनों में अपनी साड़ी तैयारी कर लूँगा | दो दिन बीत चुके थे, अगले दिन ही मैं बीमार पद गया | मेरे माता-पिता ने मुझे कहा कि अगर मैंने पहले पढ़ाई शुरू की होती, तो मैं ठीक-ठाक अंक ला सकता था | मैं बहुत दुखी हो गया क्योँकि मैंने परीक्षा के लिए ज़्यादा पढ़ाई नहीं कर पाया और परीक्षा को सिर्फ कुछ ही दिन रह | मुझे स्वस्थ होते-होते दस दिन बीत गए | परीक्षा के लिए अब सिर्फ तीन दिन रह गए थे | मुझे अंदर ही अंदर बहुत खराब लग रहा था कि अगर मैं अपने माता-पिता की बात मान जाता तोह परीक्षा में कुछ तोह लिख पाटा | मेरी परीक्षा अफ़सोस इतनी अच्छी नहीं गयी….

अंक मिलने के बाद मुझे पता चला कि मैं फेल हो गया था; मेरे सब ही दोस्त खिल्ली उड़ाने लगे और ताने मारने लगे | मेरे अंक देखखर मेरे माता-पिता बहुत दुखी हो गए थे | उन्हों मुझे कहा कि घमंड के कारण, पहले से पढ़ाई न शुरू करने की वजह से मुझे यह दंड मिला | मैंने उस ही दिन ठान लिया कि मैं आने वाली परीक्षा के लिए दो-तीन महीने प्राय पढ़ाई शुरू कर दूंगा, और पूरी कक्षा में फिर से प्रथम स्थान पर आऊंगा | इस अनुभव से मुझे यह सीख मिली की सफलता मिलने से घमंड नहीं करना चाहिए और सदैव अपने माता-पिता का कहा सुनना चाहिए | सफलता पाने के लिए हमें पहले से ही वियामत योजना पर काम करना चाइये | 

                                                                    – सूरज साहू  8B AVM JUHU