एक समय की बात  है सन  १९५० में  एक लड़का मुंबई के एक गरीब घर में पैदा हुआ।  उसके माता-पिता के पास इतने पैसे नहीं थे की वह अपने बेटे को  अच्छी  पाठशाला में डाल सकें।फिर भी उन्होंने दूसरों  से पैसे माँग  कर  अपने बेटे को पढ़ाया। उसमें एक ऐसी बात थी जो दूसरों में नहीं थी। वह पढ़ाई में उतना अच्छा नहीं था पर वह बहुत बुद्धिमान था। 
वह दसवीं कक्षा में २ बार असफल हो चूका था और तीसरी बार असफल होते होते बच गया। फिर उसने महाविद्यालय की पढ़ाई  शुरू करी । उसके वहाँ  भी उतने अच्छे अंख  नहीं आते थे। महाविद्यालय समाप्त होने के बाद उसने काम ढूंढना शुरू किया। परन्तु उसके कम अंख की वजह से कोई  उसे काम पर नहीं रख रहा था। अब वह   समझ गया था की उसे कोई भी काम मिले चाहे वह नौकर का हो ,वह उसे मन लगाकर करेगा। उसने यह बात अपने ह्रदय में अच्छी तरह बिठाली   थी। उसका एक धनी मित्र था ,राम।  राम को एक बड़ी कंपनी में काम मिल  गया था। राम ने उस लड़के को नौकर  का काम दिला दिया। वह लड़का नौकर के काम  साथ-साथ कंपनी का  काम भी देखता था। वह बारह  बजे तक नौकर का काम खत्म करता था और फिर राम से कंपनी का सारा  काम सीखता था। एक साल तक उसकी मेहनत देख कर उसे काम पे रख लिया। उसने कंपनी में २  साल तक काम करके अनुभव पाया।  उसने  वही कंपनी में  साथ साल तक काम किया। साथ साल बाद वह कंपनी का सी.ई.ओ बन गया। इसे उसने बहुत पैसे कमाए पर उसे अपनी  कंपनी खोलनी थी  तो उसने सी.ई.ओ का पद छोड़कर अनेक कंपनियों में काम कर बहुत अनुभव पाया। फिर उसने अपनी एक कंपनी शरू करि और धीरे-धीरे उसकी कंपनी पूरे दुनिया में मशहूर हो गयी। फिर वह दुनिया के  अमीर लोगों में से एक बन गया। 
आज उसका नाम पूरी दुनिया जानती हैं। उनका नाम धीरूभाई अम्बानी हैं। उनकी शादी भी हो गयी हैं और उनके पास दो बेटे हैं जो अपने पिता की तरह महेनति है। वे भी अपने पिता नाम रोशन कर रहे है। इससे हमें  पता चलता की जीवन रूपी यात्रा में हमेशा एक किताब साथ नहीं देती हैं पर अनुभव  साथ देता है। हमें विफलता के पीछे सफलता का सुअवसर ढूँढ कर उसके कदम पर चलना चाहिए और यह  काम सिर्फ़  अनुभव  से ही हो सकता है। 
आर्यन भतीजा १० बी  

AVM JUHU