समस्त विश्व में कोई भी इंसान ऐसा नहीं है जिसने अपने अनुभव से कुछ सीखा ना हो ।कोई व्यक्ति जल्दी समझ जाता है और किसी को समय लगता है परंतु सीखते सभी हैं ।इसलिए कहते हैं कि जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक अनुभव होता है ।किताबों से हम काफी कुछ सीखते हैं परंतु मनुष्य हर बात सिर्फ किताबों से नहीं सीख सकता ।उसे कभी ना कभी अपने अनुभव का सहारा लेना ही पड़ता है और धीरे-धीरे अपने अनुभव से ही उसे जीवन की सच्चाई पता चलती है ।हमारा अनुभव हमें सही और गलत का फर्क बताता है ।मनुष्य गल्तियाँ करता हैं यह उसका स्वभाव है ।अनजाने में कई बार हम गलत काम कर जाते हैं परंतु अपनी की गई गल्तियों को सुधार कर हम अपना वर्तमान और भविष्य बना सकते हैं ।अकसर बड़े लोग कहते हैं कि हमने अपने बाल धूप में सफेद नहीं किए हैं। इसका मतलब यह है कि उन्हें अपने जीवन का अनुभव है। उन्होंने अपने जीवन में बहुत कुछ देखा और समझा है ।कहते हैं कि जहां सूर्य की रोशनी भी नहीं पहुंच सकती वहाँ पर अनुभवी इंसान की सोच पहुँच सकती है शायद इसलिए ही कहा गया है कि मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा सुख है शिक्षक है ।

सोहम मेहता

सातवी क

आर्य विद्या मन्दिर(बाँद्रा पूर्व)

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