अतीत हमारे कर्मो का लेखा जोखा है | जो कर्म हम करते हैं वो हमारे अतीत के रूप में कैद हो जाते हैं | कर्म अच्छा भी हो सकता है और बुरा भी | कर्म कभी मिटते नहीं ,अच्छे कर्म जोअतीत में किए गए वे भविष्य में अच्छा प्रभाव दिखाते हैं | और मन को शांति तथा प्रसन्नता देते हैं | अतीत में किए गए बुरे कर्म भविष्य में बुरा प्रभाव दिखाते हैं और हमारी समस्याओं तथा परेशानियों का कारण बनते हैं |
वर्तमान और भविष्य की नींव अतीत में रखी जाती है | वर्तमान और भविष्य की अच्छी और बुरी घटनाओं के पीछे कहीं न कहीं अतीत में किए गए बुरे तथा अच्छे कर्मों का योगदानहोता है | अतीत में किए गए कर्म पत्थर की लकीर जैसे होते है ,जिन्हें न तो मिटाया जा सकता है नही बदला जा सकता है | उनसे सिर्फ सीख ली जा सकती है| हमारी वर्तमान और शारीरिक और मानसिक व्यवस्था बताती है कि हमने अतीत में कैसे कार्य किए थे | अतीत का निर्धारणवर्तमान में होगा और भविष्य के लिए वर्तमान अतीत बन जाएगा |
अतीत को जाने बिना हम अतीत में कीगई गलतियों को दोहराते हैं और अपने भविष्य को बर्बाद करते हैं| हम इतिहास का अध्ययन करते हैं जिससे कि हम यह समझ सके कि अतीत में क्या बुरा हुआ था और उसे कैसे बेहतर किया जाए ? इतिहास हमें यह भी बताता है कि कौन सीघटनाएँ अच्छी थी और हमें भविष्य में क्या करना चाहिए | वर्तमान समय में प्रत्येक सफल व्यक्ति ने अपने अतीत में बहुत मेहनत की होगी | इसलिए अपने वर्तमान और भविष्य को बेहतर बनाने के लिए अतीत में मेहनत करना अनिवार्यहै |
हमारे धार्मिक ग्रंथों से भी यही शिक्षा मिलती है कि अतीत के कर्म भविष्य कीरचना करते हैं जैसे कि रावण तथा कंस द्वारा किए गए बुरे कर्मों की वजह से भविष्य में बुरा फल प्राप्त हुआ औए युधिष्ठिर द्वारा अतीत में किए गए अच्छे कर्मों की वजह से भविष्य में राज्य की प्राप्ति हुई |
एक प्रसिद्ध मुहावरा है “ बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए “ भी यही सीख देता है कि अतीत ही भविष्य का रचयिता है | अतीत ही भविष्य का पाठ है | अतीत के अच्छेकर्मों द्वारा हम उज्जवल भविष्य की नींव रख सकते हैं| इसलिए भविष्य की घटनाओं से सीखकर हमें ओने उज्जवल भविष्य औए एक उन्नत समाज का निर्माण करना चाहिए |

मानस गोएल
पाँचवी‘अ’
बांद्रा(पूर्व)