मनुष्य हमेशाअपने भविष्य के लिए चिंतित रहता है| वह अतीत की सोचता है, भविष्य की सोचता है, और वर्तमान से डरता है| हर मनुष्य काअतीत होता है. अतीत को याद करते हुए समझते हुए हमेंअपने वर्तमान में जीना जरूरी है| हमें अपनेअतीत से सबक लेते रहना चाहिएऔरभविष्य की योजना बनाते रहना चाहिए। साथ ही साथ वर्तमान काआनंद भी लेते रहना चाहिए |अतीत में हुएअनुभवों का संस्मरण करनाअच्छी बात तो नहीं पर सबक जरूर सीखना चाहिए | भविष्य को उज्ज्वल करने के लिए हमें अतीत की ग़लतियों को वर्तमान में सुधारना चाहिए |

अतीत केअनुभव अच्छे हो या बुरे हमें सीखना चाहिए | किसी भी संस्कृति को समझने के लिए हमें उसकाअतीत जान लेना चाहिए | किसी भी मनुष्य का अतीत कैसा भी हो, वर्तमान में हमें उसकी बुरी परछाईं नहीं पड़ने देनी चाहिए | हमें अतीत के गैर जरूरी बातों को भुलाकर, भविष्य के निर्माण करना चाहिए | हमें हर बुरेअनुभव को भुलाकर मन में सुविचार रखकर भविष्य की बुनियाद रखनी चाहिए | जो अनुभव सुलभ नहीं, उनको भुलाकरआनेवाले भविष्य के बारे में सोचना चाहिए | इससे हम अपना भविष्य बेहतर बना सकते हैं |

हर राष्ट्रीय संस्कृति का भी अतीत होता है | कई ज्ञानी विद्वान इन अतीत से जुड़े हुए होतेहैं | उनसे प्रेरणा लेकर हमें अपने भविष्य की नींव रखनी चाहिए | मनुष्य को वर्तमान में केंद्रित करके भविष्य की संकल्पना तथा रचना करनी चाहिए | स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई महानुभावो के बलिदान के संघर्ष का भी हमें ध्यान रखना चाहिए | जिस –तरह स्वतंत्रता सेनानियों नेअपनी सूझ बूझ, निष्ठा सेअंग्रेजों से देश कोआजादी दिलाई, उसी तरह हमें अपने अतीत की गलतियों को सुधारकर निष्ठाऔर सूझबूझ से अपना भविष्य सुधारना चाहिए | सचमुच अतीत के अनुभव ही भविष्य के लिए पाठ बन सकते हैं |

धृती जैन
कक्षा पाँचवी ‘अ ‘
बाँद्रा पूर्व