आता हुआ अतीत

भविष्य जिसे जीते हुए भी

अभी जानना बाकी है।

 

दरवाज़े के परे ज़िंदगी है

और अटकल लगी है मन में  कि

बाहर या भीतर

इस तरफ या उधर

यह बंद है या खुला !

किसे है प्रतीक्षा वहाँ मेरी

किसकी है प्रतीक्षा मुझे

अभी जानना बाकी है।

 

एक कदम आगे

एक कदम छूटता है पीछे

सच ना चाबी है ना ताला।

Aditi Chopra, 6C

AVM Juhu