अंतरिक्ष

अंतरिक्ष

अंतरिक्ष यानी कि हमारे पृथ्वी के बाहर का वातावरण | अंतरिक्ष के अंदर  बहुत से तारे और पृथ्वी के जैसे  ग्रह परिक्रमाएं करते रहते हैं| अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव खत्म हो जाता है इसलिये मानव का भार भी शून्य या शून्य के समीप होता है।

 

गुरुत्वहीनता से जिससे मानव शरीर पर अनेकों प्रभाव पढ़ते हैं जैसे अंतरिक्ष यात्रियों की रीढ़ की हड्डी का कॉलम फैलता है। उनकी लंबाई 5 से 8 से.मी. तक बढ़ जाती है। यात्री जब अंतरिक्ष में नींद लेते हैं तो अपेक्षाकृत कम खर्राटे लेते हैं। इसके लिये गुरुत्वाकर्षण बल जिम्मेदार है।


अंतरिक्ष यात्रा के बाद लौटने वालों के लिये पृथ्वी के वातावरण से तालमेल बिठाना कठिन होता है। कई रूसी अंतरिक्ष यात्री स्वीकार करते हैं कि पृथ्वी पर लौटने के महीनों बाद भी वे कॉफी के मग को हवा में छोड़ देते थे

 

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आज भारत विश्व का एक ऐसा विकासशील राष्ट्र बन चुका है, जो विश्व के सर्वाधिक विकसित राष्ट्र रूस और अमेरिका की वैज्ञानिक शक्तियों से प्रतिस्पर्धा करते जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान विज्ञान की प्रगति से भारतीय वैज्ञानिकों की अद्भुत प्रतिभा, साहस, धैर्य, क्षमता और जिज्ञासा की भावना प्रकट होती ही है। इसके साथ हमारे देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों का महत्व प्रकट होता है। इसके साथ ही साथ विश्व में भारत अंतरिक्ष अनुसंधान विज्ञान के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी भूमिका भी प्रस्तुत करता है। हमें अपने देश के इस अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अपूर्वा योगदान देने वाले वैज्ञानिकों को पाकर अत्यंत गर्व होता है।

 

कशिश हमराजनी

१० बी

आर्य विद्या मंदिर बांद्रा पश्चिम