कुछ वर्ष पहले की बात है । तीन दोस्त थे,देवेन,भावेश और प्रेमराज । एक दिन वे “कोई मिल गया” फ़िल्म देखने गए । फ़िल्म की कहानी में जादू नामक अन्यदेशीय को देखकर उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ और उसी प्रकार के अन्यदेशियों को मिलने की इच्छा प्रकट हुई ।

अपनी इसी इच्छा को पूरी करने के लिए उन तीनों ने कुछ दिनों के बाद अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए प्रशिक्षण शुरु किया । कुछ सालों की कड़ी मेहनत के बाद , वे प्रशिक्षित अंतरिक्ष यात्री बन गए । उन्होंने अंतरिक्ष में जाने की अनुमति लेने के लिए सरकार को आवेदन पत्र भेजा । सरकार ने उनका पत्र स्वीकार कर उन्हें अनुमति दे दी । वे बहुत ख़ुश खे , आख़िर उनकी इतने सालों की मेहनत कुछ तो रंग लाई । कई तैयारियों के बाद , वे अंतरिक्ष में जाने के लिए उद्यत थे । जिस दिन का , तीनों दोस्तों को , बेसब्री से था इंतज़ार , आख़िर वह दिन आ ही गया । देवेश,भावेश और प्रेमराज ने अपने-अपने परिवारों को अलविदा कहा । वे एक स्पेस शटल में बैठे और पंछी की तरह उड़ गए । अंतरिक्ष में आते ही , उन्हें अलग महसूस होने लगा । दूर-दूर , सितारे चमक रहे थे । जब उन्होंने पीछे देखा,तो उन्हें एहसास हुआ कि असल में धरती कितनी सुंदर ग्रह है । देवेश ने तो कभी ऐसा नज़ारा नहीं देखा था ,और भावेश को ऐसा लग रहा शा जैसे वह स्वर्ग में पहुँच गया । प्रेमराज को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था की वह अंतरिक्ष में था ।तीनों दोस्तों की ख़ुशी का ठीकाना न रहा ।वे अन्य देशीयों को देखने के लिये बहुत आतुर हो रहे थे ।वे बातों बातों में अपनी भावनाएँ व्यक्त कर ही रहे थे की अचानक स्पेस शटल में ये कुछ आवाज़ों आने लगी।उन्होंने पता लगाया की सपेसशटल में कुछ ख़राबी थी।धीरे धीरे वह उनके नियंत्रण से बाहर जाने लगा।वह तीनों बेचैन होने लगे,उन्हें डर लग रहा था कहीं उनका स्पेस शटल किसी ग्रह से टकरा न जाए।काफ़ी देर के लिये , वे अँतरिक्ष में घुमते रहे जब अचानक से उन्हें एहसास हुआ कि वे तेज़ी से एक लाल रंग के ग्रह। की आेर बढ़ रहे थे।उन्हें पता नहीं था की क्या किया जाए।कुछ ही सेकेंड में ,वे ग्रह से टकरा गयेपर स्पेस। शटल के उत्पाद की गुणवतताओं के कारण वे सुरक्षित थे और उन्हें ज़्यादा चोट नहीं आइ।वे किसी तरह बिगड़े और आधे टूटे हुए यंत्र से बाहर निकले। और सोचने लगे कि अब वे क्या करेंगे? न कोइ लोग या अन्य देशिय ,स्पेस शटल बिगड़ा हुआ और उन्हें यह नहीं पता की वे कहाँ थे वे बहुत डरे हुवे थे।कुछ क्षणों के बाद उन्हें दूर से किसी प्रकार के विचित्र प्राणी उनके तरफ़ आते हुए नज़र आेए।देवेश,भावेश और प्रेमराज हकके-बकके रह गए।वे पीछे की और चलने लगे और उलटी दिशा मेंघूमकर दौड़ने लगे पर वहाँ से भी वे विचित्र प्राणी चलते हुए नज़र आेए।अन्य देशीयों ने उन्हें घेर लिया था वे उन प्राणियों को देखकर ख़ुश और उत्सुक तो थे पर साथ ही साथ तीनों घबराये हुए भी थे ।अनयदेशियों का शरीर नीले रंग का था।उनकी एक आँख,एक नाक,एक मुँह और चार कान थे।उनकी भाष। धरती की भाषाओं जैसी ही थी,यह आश्चर्य की बात थी।अन्यदेशीयों ने स्पेस शटल ठीक कर दिया और साथ ही साथ अन्यदेशीयाें ने देवेश,भावेश और प्रेमराज को एक जादुई यंत्र दिया जिससे वे फिर धरती पर जाने का रास्ता ढूँढ सकते थे।तीनों ने अन्य देशीयों का शुक्रिया अदा किया और अपने स्पेस शटल में बैठकर निकल गए।

धरती पर भारत में पहुँचकर उन्होंने सारे लोगों को उनकी अचम्भे में डाल देनेवाली कहानी बताई।बड़ी मुश्किल से लोगों के गले से हमारी आपबीती कहानी उतरी।पर देवेश ,भावेश और प्रेमराज का यह अनुभव वे कभी नहीं भुलेंगे।

Hetanshi Shah
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