THE HEARTLESS GUY

Once was a very friendly chap,

How kind and sweet he was,

Now he cares for noone,

As everyone just see his flaws.

Suddenly people left him,

He couldn’t understand why,

Then he changed and evolved,

Became a heartless guy.

He once used to crack many jokes,

And on his face was a golden smile,

Now that jolly vibes of him,

Have been missing since a while.

How selflessly he used to help,

And be there when needed,

Now he barely does anyone a favour,

Even if they pleaded.

Now he talks to none,

And makes no new friends,

Rejects the old ones,

Who want to make amends.

Now he gives back all the cruelty,

To those who made him cry,

His heartbreaking past experience,

Has made him a heartless guy.

~Krish Kheskani

10 A

मिल-बाँटकर रहने में सच्चे सुख सुख की अनुभूति

बहुत समय पहले हस्तपुर नाम के एक राज्य में राम नाम का एक व्यापारी था। वह एक छोटी सी झोपडी में अपनी पत्नी और दो बच्चों के रहता था , एवं उसका परिवार गरीबी का शिकार बन गया। वह अपना गुज़ारा ऊँचे कुल की सेवा कर कर लेता था। वह श्याम सेठ के यहाँ सफाई का इंतज़ाम और केशव महाराज के घर सफाई का काम करता था।  धन की कमी के कारण वह अपने बच्चों को विद्यालय भी नहीं भेज पाता | उसकी पत्नी हर रोज़ केवल एक रोटी एवं कुछ अनाज पकाती और राम और उसके बच्चों का दिन का भोजन समाप्त हो जाता |

राज्य के राजा भीमसिंह एवं उनकी पत्नी कुशला विनम्रता एवं अपनी विद्या के लिए प्रसिद्ध थे |

एक दिन राजा ने राज्य को भीतर से परखने का इरादा किया; उनहोंने एक साधु  का रूप धारण कर लिया एवं राज्य में अपने मंत्री के साथ रात को घूमने चलें| उस रात राम केशव महाराज के यहाँ काम कर कर अपनी झोपडी लौटा था एवं उसकी पत्नी ने खाना तैयार  कर लिया था | तभी दरवाज़े पर किसी के खटखटाने की आवाज़ आई। राम ने दरवाज़ा खोला तो एक बूढ़ा  साधू भर खड़ा था। साधू ने धीमे स्वर में कहा , “भाई , कुछ खाने को देदो।” राम ने कुछ देर तक विचार दिया और कहा , “ठीक है , आप हमारे साथ भोजन कर सकते  है।” राजा  राम के परिवार के साथ भोजन किया और चुप-चाप उसके घर से महल की ओर चल दिए।

अगले दिन राजा ने राम को दरबार में बुलाया एवं उसे इनाम के तौर पर कुछ सोने के सिक्के देते हुए कहा , “अन्न की कमी होने पर भी तुम्हने कल रात मुझे होने घर में भोजन करने की अनुमति दी ,मैं बहुत प्रसन्न हुआ हूँ।” तथा उसके बाद राम के मन खिल उठा ।

– प्रमर्थ कैप्टन 9 A

AVM JUHU

अनुभव – जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।  वह अकेला नहीं रहे सकता।  उसे परिवार, मित्र , दुकानदार , डॉ क्टर आदि सबकी आवश्यकता होती है। जैसे – जैसे वह दूसरो के संपर्क मेंआता है , उसके जीवन का अनुभव -क्षेत्र  बढ़ता जाता है।  अपने अनुभव से हमारे मस्तिष्क पर अमित छाप छोड़ते हैं। ये अनुभव स्तिथी और अमूल्य दोनोंप्रकार का होता हैं। अवसर पड़ने पर यह जीवन की मुसीबतों में शिक्षक की तरह हमें राह दिखता हैं। अनुभव व्यक्तिगत संपत्ति रूप मैं है , जिन्हे सदैव अपने पास सुरक्षित रखना चाहिए।  स्थापन हमें जागरूक करते है।

जब  कोई बच्चा पलंग से कूदकर उतरता है , तो बड़े एवं माता -पिता उसे मना  करते हैं।  प्रायः यही होता है कि वह उनकी बात नहीं सुनता। जब वह बच्चा एक बार गिर जाता है तब उसका अनुभव उसे वैसा करने से रोक देता है। इसी कारण कहा गया है कि पुस्तकों में लिखी बातों को पुस्तको में पढ़कर अनुभव नहीं किया जा सकता,उसमें पूर्णता नहीं होती। जो अनुभव हमें सिखा  देता है पुस्तक तो उसका आधा भी नहीं सिखा पाती। बुद्धिमान व्यक्ति वही कहलाता है जो स्वयं के ही नहीं बल्कि दूसरों के अनुभव की अनदेखी व उसे प्रेरणा लेता है।  वह अपने जीवन के हर कदम पर अनुभवों से सीख  है। ऐसा कोई वास्तु ही नहीं है जो अनुभव से ज़ादा सिखाता हो।

जोहन स्टार्क,प्रसिद्ध वैज्ञानिक ने भी अपनी कामयाबी अवं सफलता का पूरा श्रेय अनुभव को दिया था। अक्सर हम देखते हैं कि लोग बिना किसी मुश्किल कठिन सेकठिन परिस्तितियों का आसानी से सामना कर लेते हैं। यह सब उनके अनमोल अनुभव के कारण होता है , जो उन्हें हर समय सही रास्ता दिखाता है।

इसलिए कहा जाता है कि हमें अपनी धन-संपत्ति वस्तुओं पर नहीं बल्कि अनुभव पर इस्तमाल करनी चाहिए। जीवन एक यात्रा है। ऐसी यात्रा जिसमे हम हर समय सीखते हैं ,अनुभव प्राप्त करते हैं। धीर्य,सहस,विवेक,त्याग आदि गुण अनुभव से ही परिपक्व होते हैं। अनुभव की इस लम्बी यात्रा में जो व्यक्ति पहले सीखते हैं,उनके लिए इससे अधिक सोभाग्य की बात और कोई  नहीं  है। वे लोग अपनी गलतियों से सीख लेते हैं और दोबारा वह चीज़ नहीं करते। वह  अपने आचरण में बहुत सुधर लाते हैं और अपनी असावधानी वृत्ति से तुरंत छुटकारा पाते हैं। अनुभवी व्यक्ति चिंतन-मनन के पास रहता है। हम जीवन में यदि सफल होना चाहते हैं तो हमें एक अनुभवी व्यक्ति बनाना चाहिए।

जिस तरह शिक्षक हमें हाथ पकड़कर लिखना सिखाता है,बोलकर पड़ना और हमारा दोषों को दूर कर अच्छा नागरिक बनने की प्रेरणा देता है। ठीक यही काम अनुभव भी करता है। अनुभवजन्य ज्ञान हमें बहुत सी कठिनाइयों से बचा सकता है। अपना अनुभव और दूसरों की अनुभूति मिलकर सुखी जीवा के रहस्य से पर्दा उठा देते हैं। इसी कारण अनुभव जीवन का सबसे बड़ा और  शिक्षक है जो पग -पग चेतावनी देता है और हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

शिवांश खन्ना
10 ब AVM JUHU

अनुभव जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक

‘अच्छे निर्णय लेना अनुभव से आता है और अनुभव गलत निर्णय लेने से आता है।’ इस कथन की सच्चाई और इसका औचित्य इसके भीतर ही छिपा हुआ है। जो शिक्षा हमें अनुभव से प्राप्त होती है वह हमें कोई अन्य जगह या व्यक्ति से नहीं मिल सकती हैं। एक अनुभवी मनुष्य को ही सफलता आसानी से प्राप्त हो सकती हैं। पहले प्रयास में ही निर्णय लेना केवल एक इच्छा है। इसकी शिक्षा मुझे अपने एक स्वयं के अनुभव से ही मिली।

मुझे हर कार्य को अंतिम समय तक टाल देने की आदत लग गयी थी। इस आदत से छुटकारा पाना मुझे बहुत कठिन लगा। जब भी मेरी ओर कोई भी कार्य आता तो मैं उसे अंतिम घडी पर करने के लिए टाल देता। इसी गलत सोच एवं बुरी आदत के रस्ते पर चलते हुए मैंने अपने अगले कार्य को भी कुछ इसी द्रिष्टि से देखा। हमें विद्यालय द्वारा बहुत सारा गृह कार्य दिया गया था। लगभग हर विषय से था। हमें इस गृह कार्य को एक सप्ताह  के अंदर सौंप देना था। मैंने सोचा कि गृह कार्य को पूरा करने के लिए मेरे पास काफ़ी समय था। इसी सोच पर आधारित मैंने लगभग पूरा सप्ताह मौज-मस्ती करके बिताया।  गृह कार्य की ओर मेरा ध्यान ज़रा सा भी नहीं था। जब वह दिन आया जब अगले दिन हमें सम्पूर्ण गृह कार्य अध्यापिका के पास जमा करना था तब मेरे तो पसीने छूटने लग गए। क्योंकि मैंने सारा कार्य अंत में करने के लिए छोड़ दिया था , आखरी दिन पर अत्यधिक गृह कार्य के पर्वत के नीचे में दब गया। मैं  केवल  उतना ही गृह कार्य ख़तम कर पाया जितना मुझसे अत्यंत तीव्र गति से हो पाया। अगले दिन जब अध्यापिका ने गृह कार्य जमा करने के लिए मुझे बुलाया तब तो मेरा रंग ही उड़ गया। मैंने केवल चार विषयों का गृह कार्य किया था। मैंने बिना किसी उलटी-सीधी कहानी बनाए अध्यापिका को सच्चाई बता दी। इसके लिए मुझे बहुत कड़ी सज़ा मिली। सज़ा के समय मुझे एहसास हुआ कि मुझे समय को उचित रूप से बाँटना चाहिए था

इस घटना से मुझे एहसास हुआ कि मुझे समय का उचित उपयोग करना चाहिए और सभी  कार्य समय पर पूरे करने चाहिए।इस प्रकार से यह कथन  सिद्ध हो गया कि अनुभव जीवन में सबसे बड़ा शिक्षक होता है। इस घटना के पश्यचात मैंने हर निर्णय सोच-समझकर , समय को ध्यान में रखकर लिया। अनुभव द्वारा प्राप्त की गयी शिक्षा वा कई में सर्वश्रेष्ठ शिक्षा होती है।   

अमोघ रायचूर

(10-B)

विज्ञानं: वर्त्तमान का प्रतिबिम्ब 

आज का युग विज्ञान का युग है। हमारे जीवन का कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं। प्राचीन काल में असंभव समझे जाने वाले तथ्यों को विज्ञान ने संभव कर दिखाया है। छोटी सी सूई से लेकर आकाश की दूरी नापते हवाई जहाज़ तक सब विज्ञान की देन हैं ।
आज पूरी दुनिया में विज्ञानं की पताका लहरा रही है । जीवन तथा विज्ञान एक दुसरे की पर्याय बन गए हैं । विज्ञान वर्तमान का प्रतिबिम्ब है।
आज मनुष्य विज्ञान की सहायता से उड़ सकता है और मछली की तरह पानी में गहराई तक तैर सकता है। घंटो की दूरी कुछ ही देर में तय हो जाती है और जिस चिट्ठी को पहुँचने में कई दिन लगते थे वो आज मिनटों में पहुँचता है ।
विज्ञान ने कई बड़े क्षेत्रों में सफलता पाई है जैसे सूचना क्रांति, अंतरिक्ष विज्ञान, चिकित्सा आदि। विज्ञान स्वयं में एक शक्ति नहीं, वह मानव की हाथ में आकर शक्ति प्राप्त करीत है । विज्ञान मनो मानव पर निर्भर है ।
विज्ञान सवयं में एक शक्ति नहीं, वह मानव के हाथों में आकर शक्ति प्राप्त करता है । विज्ञान मनो मानव पर निर्भर है । पर हम इनसान कबसे अच्छे बन गए: अगर विज्ञान एक ओरतरक्की का प्रतिबिम्ब दिखा रहा है तोह दूसरी ओर अपनी बुराइयाँ भी ।
गोलाबारूद, बम विस्पोटक, बन्दूक, और अन्य चीज़ों का इस्तेमाल भी विज्ञान की ही देन है   । मानवता की तरक्की और विनाश दोनों का कारण सिर्फ एक है- विज्ञान । उसकी वरदानों से आज मानव, मानव का दुश्मन बन गया है ।
विज्ञान के कल कारखाने तोह बना दिए पर प्रदुषण को हटाया नहीं । विज्ञान ने अस्पताल की सुविधाएं तो दे दी पर बिमारी का कारण भी बन गया । विज्ञान द्वारा सुरक्षा के हथियार तो है पर दूसरों पर हमला करने के लिए उसका इस्तेमाल भी होता है । विज्ञान ने तकनिकी व मनोरंजन की कितनी सुविधायें दीं जिसे घंटो दूर बैठे व्यक्ति से बात तो हो जाती है परन्तु वहीं कमरे मैं बैठे व्यक्ति से नहीं ।
कहा जाता है की हर सिक्के के दो पहलु होते हैं । एक ओर विज्ञान की तरक्की आसमान छू रही है, वहीँ दुसरे ओर मानव जाती के पतन का कारण बन रही है । वह समय दूर नहीं है जब इस विज्ञान के प्रतिबिम्ब में हम सिर्फ एक याद बनकर रह जाएंगे ।
भूमिका मखीजा
XA

विज्ञान – वास्तविकता का प्रतिबिंब

भारत अपनी विविधता के लिए जाना है और इस विविधता से उत्पन्न होते है होते है हजारों अंधविश्र्वास। किन्तु हम समझ नहीं पाते कि इन अंधविश्र्वासों का रहस्यमय सत्य विज्ञान में ही छिपा हुआ है।

हमें विधालय में सिखाया जाता है कि हिंदु संस्कृति का अहम् हिस्सा है एक दूरे को , हाथ जोड़कर नमस्कार करना। नमस्ते का अर्थ है मेरी आत्मा आपकी आत्मा का आदर करती है। किन्तु. वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो जब हम अपनी हथेलियाँ जोड़ते हैं तब हमार उंगलियों की युक्त्तियाँ भी जुड़ जाती हैं।  युक्त्तियाँ वास्तव में आँखों, कानों और दिमाग के दबाव बिंदु हैं। इन्हें दबाकर, हम उस व्यक्ति को लंबे समय तक याद रख सकते हैं।

हम छोटी लड़कियों को हमेशा चांदी के अंगूठे के छल्ले पहनने से रोका जाता है और कहा जाता है कि हम उन्हें विवाह के बाद पहन सकते हैं। इसका रहस्य भी विज्ञान से ही समझा सकता है। छल्ला हमेशा पैर की दूसरे उंगुली में पहना जाता है, क्योंकि उस उंगली की एक तंत्रिका गर्भाशय(uterus) से होकर दिल से जुड़ती है। चांदी की अंगूठी पहने से मासिक धर्म चक्र (menstrual cycle) सुचारू रूप से चलता है और गर्भाशय को स्वस्थ और मज़बूत रखता है।

हमारे बुजुर्ग हम से कहा करते हैं कि कोई भी शुभ कार्य करने से पहले दही-शक्कर खाना सौभाग्य प्राप्त करवाता है। वे ऐसा कहते हैं क्योंकि दही का सेवन हमारे पेट पर शीतल प्रभाव डालता है एवं चीनी हमे तुरंत ग्लूकोज प्रदान करती है जिससे बदन मे शक्ति आती है।

SIYA JUMANI

XB

 

Don’t worry be happy

“Happiness” is a loaded word: It’s loaded with expectations, hope, yearning, confusion…. You get the idea. What makes happiness feel so elusive usually has more to do with how you relate to the concept than with how you really feel. Here are a few simple adjustments that can help you unleash the happiness within yourself.

1. Be present

Awareness is the springboard from which we can appreciate the world around us. Set reminders in your phone throughout the day to pause and check in with yourself. By stepping into a space of curiosity you will discover an increased ability to notice happiness in everyday life.

2. Harness difficulty

As long as you’re alive, challenges will find you. Sometimes you probably even create challenges for yourself—we all do. Instead of getting down on yourself, try thinking of difficult moments as opportunities to ask yourself: How can I be kinder to myself right now?

3. Get connected

Connection is more than an experience—it’s also a skill that we can strengthen with small gestures. Try smiling at a stranger, tell a friend you appreciate them, or tell a loved one how much they mean to you. Create connection in the small moments of life.

4. Turn meaning into action

What in life really matters to you? Is it family, compassion, good friends, the environment? Take these values and turn them into verbs. If you value family, make a plan to put phones aside during dinner. If it’s the environment, consider volunteering with an organization.

5. Find purpose

Getting involved in something outside ourselves has the power to infuse our daily lives with meaning amid the drudgery. Every day, ask yourself these three questions:

1. What do I care about beyond myself?

2. What action can I take today that aligns with this?

3. In the long run, how will my actions affect the world?

Practice and repeat this over time and watch your sense of purpose grow.

Sumit Sethi

9-c

AVM Juhu

dont worry be happy

Don’t worry, be happy.

How’s that for a philosophy on life.  Four simple words, one profound statement.

This all started when we talked about fear a couple of weeks ago.  One thing that was a re-occurring theme was the idea behind fear and that it is oftentimes rooted in worry.  And, listening to this song – and the simple words and actions that go along with it – made me think about worry in our lives today.

Do you worry?  About your health?  About the exams?  About your next assignment?   About your homework?  I could go on and on.  Worry.  We, as a whole, can (and do) worry about pretty much everything.  The economy is struggling.  There is much unrest in many parts of the world.  Our streets are rich with crime.  Despite modern medical advances, sickness and disease still permeate our neighborhoods.  There’s enough out there to keep us worrying constantly.  And that’s without all of our own very personal and individual problems.

Some worry is hard to avoid.  Worrying about a spouse, a child, another loved one – for instance.  These are worries out of love.  These are difficult worries to overcome.  Because they are rooted in love.  Some worries, though, are just idle worries.

What, exactly, does worry get us?  Think about it for a minute.  What good comes from worry?  Idle worry. Superficial worry.  Worry without any action.  Does this do any good?  Does sitting around, worrying – will I have a job tomorrow – does that do you any good?  No.  Or how about worrying about – did I pass that test? – does that do any good?  No.  It only “…saps today of its joy.”, as Leo Buscaglia says.

So, what do you choose today?  What do you choose the next time that “thing” arises that puts uncertainty into your life – and you are ready to retreat into your world of worry?  The choice is yours.  You can choose to worry.  Or.  Or you can choose to act.  To do something.

The inevitable.  Some things we just can’t control.  So, aren’t we better off pushing worry aside?  And living our lives.  There will be good in our lives.  And there will be some bad in our lives.  Worrying about any of this is not going to change this fact.  What can change these facts are actions, by us.

Today.  You have a choice.  You can choose to worry when life confronts you with it’s challenges.  Or you can choose to live your life.  Taking care of what you do have control over.  Yourself.  Your actions.

What do you choose?

Don’t worry, be happy…

Shalin Ghosh

9-B

AVM Juhu

Wanderlust

If I had to travel somewhere in the world,

With only my suitcase in hand,

Should I travel to a place hot or cold?

Should I travel o Greenland?

 

Perhaps I could go to China or Spain,

Or even drench myself in the London rain.

I don’t think Belgium is that far,

I could help myself to a chocolate bar.

 

Maybe I’ll gaze in wonder at the Parthenon in Greece,

And listen to the tale of the Golden Fleece,

I would learn some traditions fro the Indian folk,

And make sure in Kenya it’s the lion I don’t provoke.

 

So many places like Germany and Rome,

So many people each offering their home.

The pursuit of other travelers might be to explore the world,

But mine is to make sure my heart and mind are unfurled.

 

So to me what is a must,

Is to give in each time to my wanderlust!

 

Vivika Puranik

AVM Juhu

 

Don’t worry be happy

In every life, we have some trouble but when you worry you make it double. “Don’t worry, be happy, don’t worry, be happy.” I start with these wonderful lines of the song that is embedded in my childhood, since I grew up with it.

What is the purpose of life? To achieve happiness? To be successful, or doing what gives us the sense of happiness? Sometimes, to achieve our goals, we start worrying about failure.

How can one achieve one’s goals with a mind full of worries? The most important thing is to keep our mind relaxed and happy. We should concentrate on our actions rather than reacting or overthinking about the result which is not even known at the point of time. A happy mind can give better results than a mind full of tension. In the journey to reach your destination either you will fail or win, but in both situations you will learn something new, so enjoy the journey.

There is a great difference between worry and concern. A worried person sees a problem whereas a concerned person solves a problem. Last but not the least, happiness is not determined by what is happening around you but rather what is happening inside you so “Don’t worry, be happy.”

Mietra Kumawat

Class-4C

AVM Juhu

Don’t worry, be happy

Be light to the world,

The best thing to hold,

Onto in life is each other,

Stand tall, wear a crown and be sweet.

 

Being happy doesn’t mean that,

Everything is perfect.

It means that you have,

Decided to look beyond,

The imperfections.

 

Don’t worry, be happy,

Go with life as it comes,

Because,

The best is yet to come!

 

Avni Duggal

Class-4C

AVM Juhu

Don’t worry, be happy

Don’t worry, be happy

“Happiness” is a loaded word: It’s loaded with expectations, hope, yearning, confusion…. You get the idea. What makes happiness feel so elusive usually has more to do with how you relate to the concept than with how you really feel.

Awareness is the springboard from which we can appreciate the world around us. Set reminders in your phone throughout the day to pause and check in with yourself. By stepping into a space of curiosity you will discover an increased ability to notice happiness in everyday life. There is no experience more uplifting than giving. Practice being generous: tip the server a bit more than usual, give more to charity this month, or offer more of your time to friends, family, and strangers.

As long as you’re alive, challenges will find you. Sometimes you probably even create challenges for yourself—we all do. Instead of getting down on yourself, try thinking of difficult moments as opportunities to ask yourself: How can I be kinder to myself right now? We’ve all got habits we’d like to kick and if we could, we’d feel a lot happier. The key here is to focus on the reward you seek from any given habit. For instance, many of us snack on junk food to soothe stress. In that case, ask yourself: What else can you do in times of stress that is soothing?Getting a hug can feel soothing. So can placing your hand on your heart. Practice understanding the rewards you seek from your habits, so over time you can develop healthier ones.

At the end of each day we are usually aware of the long list of bad things that happened. What if, instead, you focused on the joys? You should make a list or write a journal entry about the things that bring you joy each day. It could be a smile a kind stranger gave you, the sweet smell of a flower you passed on the street, or the presence of a trusted friend or pet. The more you take note of what brings you joy, the more joy you’ll find in your everyday life.

To uncover happiness we need to accept what’s difficult and learn to savor the good. But the truth is we often dwell in excessively negative thinking and self-judgment. When you lose sight of your intentions, remember to forgive yourself. Investigate what pulled you off track without judging yourself, and then invite yourself to begin again.  Sanvi Goyal 

7 B 

AVM JUHU                                                                                                    

 

Wanderlust

If I had to travel somewhere in the world ,

With only my suitcase in hand

Should I travel to a place hot or cold?

Should I travel to Greenland?

 

Perhaps I could go to China or Spain,

Or even drench myself in the London rain.

I don’t think Belgium is that far

I could help myself to a chocolate bar.

 

Maybe I’ll gaze in wonder at the Parthenon in Greece,

And listen to tale of the Golden Fleece.

I would learn some traditions from the Indian folk,

And make sure in Kenya its the lion I don’t provoke.

 

So many places like Greece and Rome,

So many people each offering their home.

The pursuit of other travellers might be to explore the world.

But mine is to make sure my heart and mind are unfurled

 

So to me what is a must,

Is to give in each time to my wanderlust!

 

Vivika Puranik

4th C

AVM JUHU

 

Don’t worry , Be happy

Don’t worry , be happy,

Don’t worry , be happy,

Get out of the troubles of life ,

Get out of the troubles of life ,

Sing , dance , do everything you want ,

but don’t worry,

Sing , dance , do everything you want ,

but don’t worry,

Don’t worry , stay cool,

Don’t worry , stay cool,

Have fun all the time ,

Have fun all the time ,

don’t let that smile

fade away from your faces ,

don’t let that smile

fade away from your faces ,

Do not cry ,

Do not cry .

– Shreyas Raut 4C

 

 

 

Don’t Worry, Be Happy

Don’t worry be happy. Sometimes there is sunshine, sometimes there is rain, Don’t worry be happy. Sometimes you walk ahead, sometimes you walk behind as long, but as you keep walking it is okay. Don’t worry be happy.  Sometimes on a Sunday night and you still haven’t got your homework right, just give me a call and I will make everything alright. In every life we have some trouble and when we worry, we make it worse, Don’t worry be happy. Just do what makes you happy it’s a wonderful life and there is sunshine everywhere and all your troubles will soon pass. Say hello to your friends and sing to your hearts content. Don’t worry be happy.

-By Siddhanth Shayelesh, Class 4C

मैने हँसना सीखा है ।

मैने हँसना सीखा है
मै नही जानता रोना ;
बरसा करता पल-पल पर
मेरे जीवन मे सोना ।
मै अब तक जान न पाया
कैसी होती है पीडा ;
हँस-हँस जीवन मे कैसे करती है चिन्ता क्रीडा ।
उत्साह ,उमंग , निरंतर
रहते मेरे जीवन मे
उल्लास विजय का हँसता
मेरे मतवाले मन मे ।
सुख-भरे सुनहले बादल
रहते है मुझको घेरे ;
विश्वास , प्रेम, साहस है
जीवन के साथी मेरे ।

-Advait kulkarni 6B

Don’t worry be happy- hindi

चाहे आप एक छात्र, काम करने वाले पेशेवर, एक गृहिणी या एक सेवानिवृत्त व्यक्ति हो – खुशी आप में से हर एक के लिए एक अच्छा जीवन जीने के लिएजरूरी है। यह व्यक्ति के भावनात्मक कल्याण के लिए आवश्यक है। अगर कोई व्यक्ति भावनात्मक रूप से स्वस्थ नहीं होता है तो उसके समग्र स्वास्थ्य मेंजल्द गिरावट देखने को मिल सकती है।

भले ही खुशी बेहद जरूरी है पर दुर्भाग्यवश लोग उन तरीकों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं जिससे वे खुद को खुश रख सकते हैं। वे सब अपने व्यावसायिकजीवन और जिंदगी के अन्य कार्यों में इतने तल्लीन हैं कि वे जीवन में अच्छे क्षणों का आनंद लेना भूल जाते हैं। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि तनाव,चिंता और अवसाद के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं।

खुशी की परिभाषा और पाने के प्रयास अलग-अलग स्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं हालांकि इसका एकमात्र उद्देश्य खुश होना है। आप अपनेजीवनयापन के लिए जितनी मेहनत करते हैं अगर उतनी मेहनत अपने लिए ख़ुशी हासिल करने के लिए करेंगे तो आपके जीवन के मायने ही बदल जायेंगे।

 

किसी ने ठीक ही कहा है कि “आपको जीवन में सच्ची खुशी तब मिलेगी जब आपको यह पता चलेगा कि ख़ुशी का उद्देश्य केवल आपको खुश करना है”। सच्चीखुशी अपने भीतर होती है यह दूसरों से नहीं आती है। इस बिंदु पर कई बार जोर दिया गया है लेकिन ज्यादातर लोग इसे अप्रासंगिक मानते हैं। हमें यहसमझने की जरूरत है कि खुशी मूलतः मन की अवस्था है। यह उन चीजों से हासिल नहीं की जा सकती है जिसे हम बाहर देखते हैं। हमारे पास सकारात्मकभावनाओं की सहायता से इस अवस्था को बनाने की शक्ति है जो अच्छे विचारों से प्राप्त की जा सकती पके विचार आपकी वास्तविकता बनाते हैं।

सकारात्मक विचार और सकारात्मक मन जीवन में सकारात्मक चीजों को आकर्षित करते हैं और नकारात्मक विचार नकारात्मक अनुभवों का अहसास करातेहैं। इसलिए खुशी का अनुभव करने का एकमात्र तरीका है कि आप अपने आस-पास सभी के बारे में अच्छा सोचें।

विभिन्न स्थितियों में अति-उत्साहित या उदास होने के बजाए आपको इन सक्रिय भावनाओं जैसे शांति और संतोष को निष्क्रिय करने में परिवर्तन करनाचाहिए। इन भावनाओं को स्वस्थ बनाए रखना भी आसान है।

विभिन्न स्थितियों में अति-उत्साहित या उदास होने के बजाए आपको इन सक्रिय भावनाओं जैसे शांति और संतोष को निष्क्रिय करने में परिवर्तन करनाचाहिए। इन भावनाओं को स्वस्थ बनाए रखना भी आसान है।

नकारात्मक विचारों को मन में पालना और जीवन में कई चीजों के कारण चिंता और तनाव की स्थिति में रहना आसान है। आपको हमेशा अपने आप कोअच्छे समय और सभी अच्छी चीजों के बारे में याद दिलानी चाहिए। यह आपके मूड को नकारात्मक से सकारात्मक अवस्था तक स्थानांतरित करने का एकअच्छा तरीका है। 

Manya Yadav
Vlll th C
Roll no :16

AVM Juhu

Wanderlust

 

   

Its always worth it…
She saw the grass
Which was around her
On top of brown land
It looked like green fur.
She just sat there alone
With no soul hovering
It felt like the world,
Was behind a covering
The darkness in the night
Made it even worse
She felt as if
It was some sort of a curse
The wind was blowing
Just against her face
She could feel the strangeness
In every single place
It was a moonless night
With no stars in the sky
She felt so broken that
A tear rolled down her eye.
Not even a finger did she move
But just sat there and thought
Of all the times she spoke up
Or all the times she fought
She screamt out so loud
And banged her fist in distress
And wondered why God
Had made her life into a mess
She asked herself
That why was she born a girl
Wasn’t she supposed to be,
Her family’s little pearl?
She wasn’t treated like her brother
Who was the king of the house
Because in front of a man
She was even less than a mouse
She was denied further education
At sixteen, a tender age
And forced into marriage
Feeling trapped like in a cage
She couldn’t think of just
Becoming someone’s wife
So she looked around for help
And found a sharp knife
When she held the knife
The atmosphere was filled with mist
The knife was just a centimeter away
From cutting off her wrist
As tears rolled down her eyes
She looked high up top
Something happened and she dropped the knife
That something made her stop
She rose and stood up
Shaking her head
She said to herself
She cannot be dead
She took a brave step forward
And walked quite a bit
Until she decided that
She was never going to quit
She ran and ran and ran
From that place worse than hell
Because inside she knew that
She deserved to be treated well
Years have passed by
But she still stands strong
For she has fought a battle
Which lasted very long
Today she is successful
And stands out in a crowd
Because she beleived in herself
And made herself proud
Today she has the courage
To stand tall and say
That she is a woman
And takes pride in being that way
Life hasn’t been easy for her
She has toiled and worked hard
She protected herself from everything
For she was her only guard
 She said, “Life will throw you into problems
And you will have your bad bits
But in the end you will realize
Its all going to be worth it.”
Khushi Madan
Class-9C
AVM Juhu

भ्रमण लालसा

किसी महान व्यक्ति ने कहा है कि, वे व्यक्ति असाधारण होता है जो दुनिया भर में भ्रमण करता है।छोटी छोटी जगहों पर घूमकर हम बड़े बड़े अनुभव ले सकते हैं ।
एक ही स्थान पर सीमित रह कर हमारी मानसिक परिस्थिति का विकास असंभव है।दुनिया भर में सैंकड़ों अलग देश हैं,संस्कृतियाँ हैं ,प्रांत हैं ,धर्म हैं और भिन्न भिन्न प्राकृतिक नज़ारे हैं। इन सब से परिचित होकर व्यक्ति की मानसिक सीमाएँ खुल जाती हैं।
भ्रमण करते हुए हम नए लोगों से मिलते हैं ,नई वेष भूषाओं को देखते हैं,अलग प्रकार के भोजन खाते हैं । इतना ही नहीं हर -अलग स्थान पर हमें अलग प्रकार के जीव जंतु ,पशु-पक्षी ,खेत खलयानऔर अलग मौसम मिलते हैं ।
मैं अपने माता पिता के साथ बचपन से ही बहुत सारी जगह घूमने जाता हूँ । मैंने कभी रेगिस्तान देखा तो कभी बर्फ़ीले पहाड़, कभी दुबई के बुर्ज ख़लीफ़ा पर गया तो कभी होंगकोंग के डिज़नीलैंड। मैंने बहुत सारी जगह देखी हैं। जब भी मैं एक  नई जगह जाता हूँ तो मैं वहाँ के बारे में बहुत सारी चीज़ें  सीखकर आता हूँ।
मेरे और मेरे परिवार की यह भ्रमण लालसा कभी तृप्त नहीं हो सकती है क्योंकि अनुभवों की किताब में नए पृष्ठ जुड़ते जाते हैं ।
Pratham Kulshreshtha
Class 5 A
Roll no. 27

wander lust

 

Wanderlust is a rather vague emotion, a twinge in the back of your mind, a pang at the edge of your heart, but it is completely undeniable and can bring the most longing and the most satisfaction of anything I have ever felt.

It is a love for exploring, for learning, for seeing what you have never seen before.

In this travelogue I am going to be writing about my trip to Australia in May 2016. I went to Australia for 20 days. I had gone to 4 cities –Perth, Melbourne, Adelaide and finally Sydney. I visited 3 of my cousins who live in Australia. Two of them live in Perth and my third cousin lives in Melbourne.

First I went to Perth to stay with my two cousin brothers. We did a lot of things likekayaking, hiking etc. We went to a garden called The Banksia Garden which had a huge fountain in the center of the garden. We also did some cycling and scootering. They have a table tennis table at home, and we used to play table tennis at night. They even have an Xbox. We went to a dam as well.

Then I visited Melbourne to meet my third cousin. Perth is on the west coast of Australia, while Melbourne is on the east coast of Australia. It is a very long flight from Perth to Melbourne that takes 3 hours! In Melbourne we lived in a hotel and visited my cousin brother at their home.We drank some hot chocolate and had dinner there too. I sat in a Tram for the first time in my life. We did shopping in the Queen’s market. My uncle drove us to The Great Ocean Road where we were awestruck by the beauty of the twelve Apostles! We also went to Philip Island nearby to see ”The Penguin Parade”- we could see the cute penguins coming from the ocean to the beach and into their little houses which were boxes put there by the staff.

After Melbourne, we visited Adelaide for sightseeing, where we roamed around in the city. We ate dinner in an Indian restaurant, it was so good to eat Indian food after a long time! We were finding the restaurant for so long. From Adelaide, we also visited the Cleland Wildlife Park where we saw all sorts of animals like kangaroos, koala, ducks etc.

Finally we went over to Sydney. In Sydney we went for a Helicopter ride and it was so awesome, the view was so good. We celebrated my 10th birthday in Sydney. We saw the Sydney Harbour Bridge, and also went to the Darling Harbour.  Then after that we were travelling the whole day to come back home.

I was so happy and thankful that my mother and father gave me a trip to Australia for my birthday. I was a little sad to leave Australia but I was also happy to come back home and meet all my friends in June.

 

Yutika Dighe

6B

Roll no-3

AVM juhu