Happiness depends on ourselves

जब मैं छोटा बच्चा था
बिन बात के हँसता रहता था
ना कुछ समझ थी, ना कुछ समझता था
फिर भी हर दम चहकता रहता था
माँ की लॉरी से राते मधुर हो जाती थी
ऑचल में उनके नींद बड़ी सुहानी आती थी
पापा के कंधे पर खड़ा सबसे बड़ा बन जाता था
दादी की कहानियों में राजकुमार मैं ही कहलाता था
दादू के लड़खड़ाते क़दमों का सहारा मैं बन जाता था
छोटी छोटी ख़ुशियों में ऐसे ही मैं मुस्कुराता था
अब जब मैं बड़ा हो गया हूँ, ना जाने सब समझ से परे रहता हूँ।
सब कुछ वैसा ही है, फिर भी ना जाने क्यों कम ख़ुश रहता हूँ।
दुनिया की इतनी परवाह क्याें होती है,  हँसी भी कही दबी रहती है
ख़ुश रहने में क्यों डर लगता है, जब की वो तो हक़ अपना है
ऐ दोस्त ना खोज इसे और मैं
बचपन से ही तो देख रहे है इसे हम अपनी राहों में
मिल जाएगी हमें ये ढ़ूढ़गे इसे जो हम अपनी मुस्कुराहटों में
क्यों की ख़ुशी तो निर्भर होती है ख़ुद के ही विचारों में !!
शौर्य मुंधरा
5C
बांद्रा( ई)