अनुभव जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक

जीवन कभी हँसता,

कभी रुलाता

तो कभी गुदगुदाता है

इसका हर पल हमें कुछ न कुछ सिखाता है।

कभी धुप तो कभी छाँव,

कभी दोस्तों पर प्यार तो कभी गुस्सा आता है,

ऐसा हर पल जिंदगी को हसीन बनाता है।

हर परीक्षा का निश्चिंत परिणाम है,

परिश्रम ही सफलता का आधार है,

जीवन की नैया यदि डाँवा डोल हो जाये तो उसका खिवैया ही उससे पर लगता है।

बेहतहाशा  दर्द व तकलीफ है,

तो बेइंतहा  मोहबत्त भी है ,

हर रास्ता किसी न किसी मंजिल तक,

ले ही जाता है।

भूक, धुप और निराशा को,

होंसलों से हराया है,

यूँ ही नहीं  हर दिन को रात का और

अँधेरे को उजाले का इंतज़ार रहता है।बात बात पर नानी का यह कहना,

कि ‘ ये बाल धुप में सफ़ेद नहीं किये ‘

आज समझ आता है।

 कई उतार चढ़ाव देखें हैं,

यूँ ही नहीं ‘अनुभव जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक कहलाता है।  हम सब, जीवन के छोटे-बड़े  रास्तों में कई ठोकर खाते हैं। कभी-कभी बहुत चोटें भी लगती हैं परन्तु हर ठोकर हमें सावधानी से चलना सिखातें हैं। अंधेर के बिना प्रकाश नहीं और दुःख के बिना सुख नहीं, बस यहीं हमारा जीवन हैं। मेरे अनुसार जीवन एक खुला सागर है और तकलीफे लहर है पर अगर हम सागर में तेरे तो  इसकी लेहरे हमें एक सुन्दर टापू पर पहुंचा देती है। हमें बस हिम्मत रखकर आगे बढ़ना चाहिए। अनुभव से बड़ा कोई शिक्षक नहीं होता क्योंकि यह हमें गुण, व्यक्तित्व और लड़ने की शक्ति देता है जो शायद कोई और शिक्षक सच्चे उद्धरण के साथ नहीं सीखा सकता। इसलिए निराशा को साथी न बनाकर आगे बढ़ते रहना चाहिए क्योंकि सच्चे और मेहनती लोगों के भाग्य में अच्छे दिन ज़रूर आता हैं।

Manya Chopra 10 B 

AVM JUHU

अनुभव जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक

एक समय की बात  है सन  १९५० में  एक लड़का मुंबई के एक गरीब घर में पैदा हुआ।  उसके माता-पिता के पास इतने पैसे नहीं थे की वह अपने बेटे को  अच्छी  पाठशाला में डाल सकें।फिर भी उन्होंने दूसरों  से पैसे माँग  कर  अपने बेटे को पढ़ाया। उसमें एक ऐसी बात थी जो दूसरों में नहीं थी। वह पढ़ाई में उतना अच्छा नहीं था पर वह बहुत बुद्धिमान था। 
वह दसवीं कक्षा में २ बार असफल हो चूका था और तीसरी बार असफल होते होते बच गया। फिर उसने महाविद्यालय की पढ़ाई  शुरू करी । उसके वहाँ  भी उतने अच्छे अंख  नहीं आते थे। महाविद्यालय समाप्त होने के बाद उसने काम ढूंढना शुरू किया। परन्तु उसके कम अंख की वजह से कोई  उसे काम पर नहीं रख रहा था। अब वह   समझ गया था की उसे कोई भी काम मिले चाहे वह नौकर का हो ,वह उसे मन लगाकर करेगा। उसने यह बात अपने ह्रदय में अच्छी तरह बिठाली   थी। उसका एक धनी मित्र था ,राम।  राम को एक बड़ी कंपनी में काम मिल  गया था। राम ने उस लड़के को नौकर  का काम दिला दिया। वह लड़का नौकर के काम  साथ-साथ कंपनी का  काम भी देखता था। वह बारह  बजे तक नौकर का काम खत्म करता था और फिर राम से कंपनी का सारा  काम सीखता था। एक साल तक उसकी मेहनत देख कर उसे काम पे रख लिया। उसने कंपनी में २  साल तक काम करके अनुभव पाया।  उसने  वही कंपनी में  साथ साल तक काम किया। साथ साल बाद वह कंपनी का सी.ई.ओ बन गया। इसे उसने बहुत पैसे कमाए पर उसे अपनी  कंपनी खोलनी थी  तो उसने सी.ई.ओ का पद छोड़कर अनेक कंपनियों में काम कर बहुत अनुभव पाया। फिर उसने अपनी एक कंपनी शरू करि और धीरे-धीरे उसकी कंपनी पूरे दुनिया में मशहूर हो गयी। फिर वह दुनिया के  अमीर लोगों में से एक बन गया। 
आज उसका नाम पूरी दुनिया जानती हैं। उनका नाम धीरूभाई अम्बानी हैं। उनकी शादी भी हो गयी हैं और उनके पास दो बेटे हैं जो अपने पिता की तरह महेनति है। वे भी अपने पिता नाम रोशन कर रहे है। इससे हमें  पता चलता की जीवन रूपी यात्रा में हमेशा एक किताब साथ नहीं देती हैं पर अनुभव  साथ देता है। हमें विफलता के पीछे सफलता का सुअवसर ढूँढ कर उसके कदम पर चलना चाहिए और यह  काम सिर्फ़  अनुभव  से ही हो सकता है। 
आर्यन भतीजा १० बी  

AVM JUHU

मिल-बाँटकर रहने में ही सच्चे सुख की अनुभूति हैं

मिल बाँटकर  रहने से हमें सुख के साथ आशीर्वाद भी मिलता है। अगर हम किसी को अपने पुराने कपड़े या किताबें देते   चेहरे पर सुख देखकर कितनी खुशी होती है। इससे हमें उनके आशीर्वाद के साथ-साथ सुख का अनुभव ही होता है। इस विषय पर एक बहुत मनोरंजक कहानी है जो हमें मिल बांटकर रहने का महत्त्व बताती  हैं। 
एक छोटे गांव में दो अच्छे मिटक रहते थे। उनका नाम अरुण और रमज़ान था। दोनों मित्र  रोज़  नदी के किनारे जाकर मिल  जुल कर खेलते थे। एक दिन जब वे दोनों नदी के किनारे से खेलकर घर लोट रहे थे ,उन्हें रस्ते में एक भिकारी मिला। उस भिखारी के पास कुछ खाने या पीने के लिए नहीं था। अरुण और रमज़ान के पास कुछ खाना था। रमज़ान ने अरुण को कहा “अरुण,मुझे इतनी भूख नहीं है ,और तुमने भी अभी-अभी आम खाया है तो हम अपना सारा खाना इस भिखारी को दे देते है।” अरुण ने ऐसा करने से इंकार कर दिया और उसने कहा “मैं अपना खाना नहीं दूँगा।”रमज़ान ने अरुण की बात पर ज्यादा ध्यान  नहीं दिया  और अपना सारा खाना भिखारी को दे दिया। उसे बदले में कुछ नहीं मिला पर उसे सुख की प्राप्ति हुई। वे बहुत कुश हो गया और उसे बदले में कुछ नहीं चाहिए था। इस कहानी से हमें  सीख मिलती हैं की ज़रूरी नहीं हैं की हमें हमारे अच्छे कर्मों के लिए बदले में कोई चीज़  मिलेगी,पर हमें अच्छे कर्म करने पर हमें एक ऐसी सुख की प्राप्ति होती हैं जो हज़ार चीज़ों  भी अधिक होती हैं। जैसे सभी कहतें हैं की अच्छे कर्म करने का इनाम अच्छा होता है। तो जभी कुछ अच्छा करके हम कोई इनाम कमाते हैं  हमारे लिए सबसे बड़ा और अच्छा होता हैं। 
रिया श्रीवास्तव १० बी 

AVM JUHU

अनुभव जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक

श्याम एक फुटबॉल खिलाडी था। वह आज एक प्रोफेशनल मैच खेलें वाला था। उसके पास बहुत ज़्यादा टैलेंट था। जब टीम की सिलेक्शन हो रही थी तो उसने शानदार प्रदर्शन दिखाया था और तुरंत सेलेक्ट हो गया।  उसके पास खेल के बारे में बहुत शिक्षा थी परन्तु अनुभव जो की सबसे है वह उसके पास नहीं था। वह बहुत डर गया था। जब मैच का समय आया तो उसके पसीने छूट पड़े। उसने आसान से आसान शॉट मिस  कर दिए और उसकी टीम बहुत बुरी तरीके से हार गयी। वह  बहुत  महसूस करने लगा। उसमे बिलकुल भी आत्मविश्वास नहीं बचा। उसने टीम छोड़ने का भी सोचा। पर अँधेरे में रोशनी की तरह उसके दोस्तों ने उसकी मदद की। उसको खुश करने में उसके दोस्तों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। उसने वापस मैच खेले और श्रेष्ठ खिलाडी बन गया। वह अपना हर मैच में कम से कम दो गोल मरता था। सोचो की पाँच साल के अनुभव ने श्याम की पूरी ज़िन्दगी बदल दी। पर अनुभव के साथ कड़ी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है। सबसे  महत्वपूर्ण बात है जो भी हो हमे कभी भी , किसी भी वजह से अपना आत्मविश्वास नहीं खोना चाहिए।

अनीष पटनी( 9A)

AVM JUHU

मिल-बाँटकर रहने में सच्चे सुख की अनुभूति

“ज़िन्दगी में कोई मनुष्य देने से गरीब नहीं हुआ” यह महान शब्द स्वर्गीय श्री मदर टेरेसा ने कहे थे। वह सच में इन शब्दों को सिद्ध करती है। उन्हें गरीबो के साथ मिल-बाँटकर रहने में सच्चे सुख की अनुभूति प्राप्त होती थी। उनकी जैसी नायिका को हम सबको सलाम कहना चाहिए और उनके दिखाए मार्ग पर चलना चाहिए।  क्योंकि उनका भी यही मानना था कि हर एक जीव धारी को उनकी तरह सच्चे सुख की अनुभूति प्राप्त होनी चाहिए।

छोटी -छोटी चीज़े जैसे सुबह उठकर कबूतरों को चारा देना ; भूखों को खाना देना और उनकी मदद करना ; गरीबों को ज़रूरतमंद चीज़े देना जैसे कम्बल , राशन आदि ; गरीब बच्चों को पढ़ाना। जैसे भगवान ने हम जैसे कुछ लोगों को आरामदायक जीवन दिया है , हमें उसे मिल-बाँटकर गुज़ारना चहिये। प्रत्येक को अपनी उन्नति में संतुष्ट नहीं रहना चाहिए। किन्तु सबकी उन्नति में होनी उन्नति समझनी चाहिए।

अंत में मैं यह कहना चाहूंगी कि मन कि सच्ची शांति , सुख और समृद्धि के लिए हमें मिल-बांटकर रहना चाहिए। फँसे जो व्यथा में , बुरी हो परिस्थिति  मिल- बाँटकर रहने में ही सच्चे  सुख की अनुभूति है।

मन्नत देसाई ( 10B)

AVM JUHU

अनुभव – जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक

अनुभव जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक हैं। मनुष्य  अपने अनुभव से बहुत कुछ सीखता है। हमारे जीवन में अनेक स्मृतियाँ होती हैं , कुछ अच्छी-कुछ बुरी,कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं जिनसे  हम  अच्छा सबक सीखते है। मेरे जीवन में भी मैंने अनेक अनुभव किए हैं,जिनसे मुझे कुछ नया सिखने को मिला। 
ऐसा ही एक यह अनुभव है। मुझे समुद्र और नदी  से बहुत डर  लगता था। मैं स्विमिंग पूल में आराम से तैर लेती थी पर समुद्र या नदी में बहुत डर लगता था। गर्मी की छुट्टियों में, मैं और मेरा परिवार अंडमान और निकोबार टापू गए। मुझे बहुत डर लग रहा था क्योंकि वहा तो समुद्र ही समुद्र थे। वह पर मैंने स्नॉर्कलिंग जिसमे हमें समुद्र के अंदर ले जाते हैं। मेरा यह डर  गया और  अगर मैंने स्नॉर्क्लिंग नहीं की होती तो शायद मेरा यह डर कभी दूर नहीं होता।  
अब मैं सभी को यह बताना चाहती हूँ कि हमारे वीर जवान जो हमारी रक्षा करते हैं,जब हम उन पर सवाल करते है तो हम क्या सोच रहे होते हैं? जब मैं सातवीं कक्षा  तब मैं भी जवानों पर  बहुत सवाल  करती थी ,लेकिन  जब मैं  और मेरा परिवार जम्मू और कश्मीर घूमने गए थे तब मुझे एहसास होआ  की मैं कितनी गलत थी। वह पर गर्मी थी पर तब भी हमारे वीर जवान  मोटी  वर्दी और हेल्मेट पहनकर देश की रक्षा  थे। वे लोग बारिश और तूफान को पीछे छोड़कर हमारे देश की सुरक्षा करते हैं। 
जब मैं कश्मीर गई   तो मुझे यह बात का एहसास होआ तथा मैंने उनके रहने के तरीकों को अनुभव किया। मैं  मेरे देश के वीर जवानों  पर बहुत गर्व करती हूँ।
मुझे याद है जब मैं दूसरी कक्षा में थी तब मुझे मेरी अंग्रेज़ी की शिक्षिका से बहुत डर लगता था। मुझे उनसे बात करने पर बहुत घबराहट होती थी। पर मेरे माता-पिता ने मुझे कहा कि मैं उनसे जाकर बात करून और अपनी समस्या बताऊं। जब मैंने उनसे बात जाकर बात करि तब मुझे एहसास हुआ कि वे बहुत अच्छी हैं और मेरा  सारा  गायब हो गया। 
यह थे मेरे  कुछ  अनुभव, जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा,जाना और अपने डरों को भुलाया। 

AVM JUHU

अनुभव – जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक

शान्ति स्थिर स्थल में,

यह अहसास   हमें  बहलाता  हैं ,

अनुभव   की  सीखों  में,

यह  जीवन  आकर  लेता  हैं।I 
बुरे   कर्म   करने   पर, ग्लानि सिखाता  हैं,

खुशी बाँटने पर,ह्रदय पिघलाता हैं।I 
रब की दुआ में मगन,विश्वास रखना सिखाता है,

मस्त,आशाओं के गगन में,प्यार करना दर्शाता हैं।I  
सोच में खोये हम,अपने आप को ढूंढ़ते हैं,

अनुराग को खो बैठे हम,

अपने-आप को रूलाता हैं,हारते है जब हम,

विश्व में प्राणियों के हर अनुभव से सीख लेते है हम।I 

अंधेर की नगरी पार करवाता है,हमें सुख देता हैं,

जीवन जीना, हमें अनुभव सिखाता हैं। 
महक गुप्ता

 कक्षा : १० बी 

AVM JUHU

अनुभव – जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक

कहते   है  अनुभव   को   जीवन  का  सबसे  बड़ा  शिक्षक,

उससे  बनता  है  मनुष्य  का  चीज़ें  जानने  का  उत्सुक।
जीवन में  हर  पल  कुछ न  कुछ  सिखाकर  जाता  है। हमारा  अनुभव  बाद  में  काम  आता  है।    
पुस्तक  से  मिला  ज्ञान  कभी  तो  मन  से  निकल  जाता  है,तभी  अनुभव  का  महत्त्व  समझ  में  हमें  आता  है। 
कक्षा  में  अव्वल  आने  के  बाद  भी  तूने  क्या  पाया,तू  जीवन  को  अपनी  आँखों  से  न  देख  पाया।
जिसने  फिर  भी  कम अंक  लाया ,आगे  चलकर  अनुभव  ही  उसकी  मदद  करने  आया। 
बन  गया  अनुभव  जीवन  में  सबसे  महत्वपूर्ण,तभी  तुम्हे  जीवन  में  सफलता  मिली  पूर्ण। 
पाठशाला  से  निकलकर  तुमसे  कोई अंक नहीं  पूछेगा ,नौकरी  तुम्हें अनुभव  के  आधार  पर ही  मिलेगी । 
अनुभव  को   जीवन   का  सबसे  बड़ा  शिक्षक  कहा  माना गया  है। पुस्तक  से  पढ़ा  हुआ  ज्ञान  जीवन-भर   तुम्हारे   साथ  न  रहेगा,  परन्तु  अनुभव  जीवन-भर  के लिए   तुम्हारे  साथ   रहेगा। तुम्हारे  नौकरी  लगने  के  समय   तुम्हारे  अनुभव   को   मन  में  रखते  हुए  ही  तुम्हें  नियुक्त  किया जाता  है ,न  कि  तुम्हारे  अंकों  के  आधार  पर।    

देवांश भट 

कक्षा :१० बी 

AVM JUHU

अनुभव-जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक

हम एक ऐसे देश के रहने वाले हैं,

जहाँ रोज़ सुबह चाय की चुस्की लेकर लोग बहुत कुछ कहते हैं 

हर बार जब कोई कुछ फैसला  लेतो हम उस पर प्रश्न पूछते हैं,

पर क्यों जब हमारे माता-पिता हमें कुछ बताते, हम उसे मान लेते हैं?

क्योंकि  उनके पास अनुभव है,

वो जानते हैं कि अगर हमने गलत काम किया उसका क्या परिणाम होगा,

और वह नहीं चाहते कि हमें परेशानी हो। 

अब तुम सही हो, अब तुम गलत,

अगर तुम आगे बढ़ चुके हो तो पीछे ना पलटो,

 क्यों न पलटो मैं,यह पूछना चाहती हूँ,

और मेरे सारे सवालों का उत्तर है ‘अनुभव’,

तो मैंने बहुत सोचा और आज लिखा,

अनुभव, क्या हो तुम,

मेरे सारे सवालों का जवाब नहीं दे सकते तुम,

पर मेरे पैरों की ज़ंजीरें हो सकते हो तुम,

जब कुछ करने जाऊँ मुझे रोक दिया जाता है,

जब उड़ना चाहूँ मेरे पंख काट देते हो तुम,

पर अब जब मुझे तुम्हारा महत्त्व समझ आया,

मैंने जाना कि तुम सही थे और मैं गलत,

तुम मेरे सारे प्रश्नो का जवाब नहीं,पर जवाब तक  पहुंचने का रास्ता थे,

 पैर जांगिड़ नहीं ,बल्कि उन ज़ंजीरों को खोलने का ताला थे,

जब भी  मैं  कुछ करना चाहूँ  रोकते नहीं पर समझते वो गलत है, जब उड़ना हो तो तुम्हारे कारण मेरे  पंख  कटते नहीं,बल्कि मुझे नए  पंख मिलते हैं।

अब जब मैंने तुम्हारा सही महत्त्व जाना तो मैं कह सकती हूँ,

अनुभव हम सबके पास  होता है,

पर जिसके पास होता है उनकी बात हमें माननी चाहिए,

क्योंकि हम सारे लोग एक खेल में है,जीवन के,

बस इस पड़ाव पर हैं,

हमारे बड़े जिनके पास अनुभव है वो हमारा पड़ाव पार कर चुके है,

उन्हें पता है कि हमारे लिए क्या गलत है और क्या सही।

इसलिए,सही ही कहा गया है कि,

अनुभव जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक है।

आर्या  चोपरा 

कक्षा : १० बी 

AVM JUHU

अनुभव जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक है

‘अनुभव जीवन का  सबसे अच्छा शिक्षक है ‘ यह एक पुरानी कहावत है परन्तु यह एक सच्ची बात है जिस पर मैं अपना विश्वास रखती हूँ। पुस्तक में लिखी हुई विद्या हमें थोड़ी ही देर तक याद रहती है  क्योंकि हमारे हिसाब से वह बहुत ही उबाऊ होती है। परन्तु अगर हम कुछ अनुभव करते तो वह हमें लम्बे समय तक याद रहती है और अगर हम उस अनुभव में कुछ गलती करते हैं तब हम उस गलती को दोहराते नहीं हैं।

पहले तो मैं यह कहना चाहूंगी कि अनुभव एक ऐसी चीज़ है जिससे आपको बहुत कुछ सीखने को मिलता है और इस दौरान हम जो सीखते हैं उससे हम कभी नहीं भूलते क्योंकि हमें पता है कि आपने जो उस अनुभव में महसूस किया वह आपके लिए यादगार है। दूसरी तरफ, अगर आपके माता पिता  दादा दादी या नाना नानी आपको कुछ सिखाते हैं हमें सदैव  के लिए याद रहता है। वह बेकार नहीं जाता है बल्कि वह हमारे दिल में रह जाता है।

दूसरी बात मैं यह कहना चाहूंगी कि अनुभव से जो सीखा जाए, वह बहुत जानकारी से भरा होता है तथा बहुत ही समझने वाली है। इससे हम अपनी गलती को समझकर उसे सुधार देते हैं। जैसे हम गणित पढ़ते हैं और हमें कुछ बहुत मुश्किल लगे हम उसका अभ्यास करते हैं तो हमे वह आसान लगने लगता हैं और परीक्षा में हमें ज़्यादा समय पढ़ना नहीं पड़ता।

अंत में मैं यह कहना चाहूंगी कि, जैसे अगर आप १३ -१४ साल के हैं तो आप ज़्यादा समय अपने दोस्तों के सात बिताएँ और उनके साथ अलग-अलग चीज़े अनुभव करना चाहतें हैं। जब आप यूनिवर्सिटी में होते हों तब आप चाहते हैं कि आप अपना कल यानी भविष्य बेहतर कैसे बनाये। जब आपकी शादी हो जाती हैं तब  आप अपने परिवार के साथ किस तरह पेश आएं यह आपको नहीं  पता पर थोडे दिनों बाद आप मुश्किलें अनुभव करते हैं तब आपको  समझ आता हैं कि आपको अच्छे से  कैसे  पेश आना है।

हमें अनुभव करना चाहिए क्योंकि आप उससे जो सीखते हो, वह बहुत मदद करता है तथा  उससे अपनी गलतियों का भी पता चल जाता है। मुझे पता हैं कि आपका परिवार भी आपको वही चीज़े बताएँगे जो शायद से आप अपने अनुभव से सीखे परन्तु आपको  जलदी  भूल जायेंगे परन्तु   यदि आप वही चीज़ अनुभव करो तब आपको वह चीज़ हमेशा के लिए याद रहती हैं।  

  Sanvi Goyal  9A   

AVM JUHU             

मिल-बाँटकर रहने में सच्चे सुख सुख की अनुभूति

बहुत समय पहले हस्तपुर नाम के एक राज्य में राम नाम का एक व्यापारी था। वह एक छोटी सी झोपडी में अपनी पत्नी और दो बच्चों के रहता था , एवं उसका परिवार गरीबी का शिकार बन गया। वह अपना गुज़ारा ऊँचे कुल की सेवा कर कर लेता था। वह श्याम सेठ के यहाँ सफाई का इंतज़ाम और केशव महाराज के घर सफाई का काम करता था।  धन की कमी के कारण वह अपने बच्चों को विद्यालय भी नहीं भेज पाता | उसकी पत्नी हर रोज़ केवल एक रोटी एवं कुछ अनाज पकाती और रामु एयर उसके बच्चों का दिन का भोजन समाप्त हो जाता |

राज्य के राजा भीमसिंह एवं उनकी पत्नी कुशला विनम्रता एवं अपनी विद्या के लिए प्रसिद्ध  थे |

एक दिन राजा ने राज्य को भीतर से परखने का इरादा किया; उन्होंने  एक साधु  का रूप धारण कर लिया एवं राज्य में अपने मंत्री के साथ रात को घूमने चले | उस रात राम केशव महाराज के ही काम कर अपनी झोपडी में लौटा था एवं उसकी पत्नी ने खाना तैयार  कर लिया था | तभी दरवाज़े पर किसी के खटखटाने की आवाज़ आई। राम ने दरवाज़ा खोला तो एक बूढ़ा  साधू बाहर  खड़ा था। साधू ने धीमे स्वर में कहा , “भाई , कुछ खाने को देदो ।” राम ने कुछ देर तक विचार दिया और कहा , “ठीक है , आप हमारे साथ भोजन कर सकते  है।” राजा  राम के परिवार के साथ भोजन किया और चुप-चाप उसके घर से महल की ओर चल दिए।

अगले दिन राजा ने राम को दरबार में बुलाया एवं उसे इनाम के तौर पर कुछ सोने के सिक्के देते हुए कहा , “अन्न की कमी होने पर भी तुमने कल रात मुझे अपने  घर में भोजन करने की अनुमति दी ,मैं बहुत प्रसन्न हुआ हूँ।” यह सुनकर राम के मन खिल उठा ।

– प्रमर्थ कैप्टन

9 A AVM JUHU

Death-A divine sleep

Death is a soothing sleep,

While sleep is like a partial death,

In contrast when in sleep,

You’re never out of breath.

The eyes are shut,

You can’t even cry,

Heart beats no more,

When the body is to die.

But the soul being immortal,

Stays young forever,

It will feel the peace,

Which it had not felt ever.

Senses just vanish away,

Sufferings and emotions are felt no more,

Soul reaches a divine state,

Which it felt never before.

The soul can recall nothing,

All memories just fade,

Death is an inevitable stage,

Which Mother nature has made.

Do not fear death,

It’s a divine sleep away from earth,

It’s just a small path,

From an old life to a new born birth.

~Krish Kheskani

Hunger for success

The ones who left,

When they were needed,

left you in dark,

When for their torch you pleaded.

Probably this happened,

As better friends you deserved,

Now with the new friends,

Your seat is reserved.

The pain the old ones gave,

Was sharp like spears,

It hit really hard,

And left you in tears,

They left you with wounds,

And how badly you bled,

“Sorry I can’t support you”,

That’s all they said.

They talked about you,

Taunted you and abused,

Yes so you’ve realised finally,

That you were just being used.

Today in life,

You’ve got all you needed,

living a lifestyle millions desire,

Yes you’ve succeeded.

You’re the best at your job,

Now you own a billion dollars,

Leaving the betrayers speechless,

Who thought they were ballers.

You’ve got a million followers,

Your fans want your autographs,

Newspapers print about you,

Media clicks your photographs.

Your left behind betrayers,

Are now in a shock,

You’ve succeeded in life,

While all they did was talk.

Now at your door they knock,

“Let’s be friends”they pleaded,

Now its your turn to say,

“You’re no more needed”

~Krish Kheskani

THE HEARTLESS GUY

Once was a very friendly chap,

How kind and sweet he was,

Now he cares for noone,

As everyone just see his flaws.

Suddenly people left him,

He couldn’t understand why,

Then he changed and evolved,

Became a heartless guy.

He once used to crack many jokes,

And on his face was a golden smile,

Now that jolly vibes of him,

Have been missing since a while.

How selflessly he used to help,

And be there when needed,

Now he barely does anyone a favour,

Even if they pleaded.

Now he talks to none,

And makes no new friends,

Rejects the old ones,

Who want to make amends.

Now he gives back all the cruelty,

To those who made him cry,

His heartbreaking past experience,

Has made him a heartless guy.

~Krish Kheskani

10 A

A MOTHER

The divine angel,

Who gave me birth,

Held me in her womb,

To bless me life on earth.

Talking to her,

Enlightens my mood,

Better than any restaurant,

Is her home made food.

She is always by my side,

No matter what,

She can see it on my face,

Whether I’m happy or not.

The one who taught,

And saw my first walk,

Me without her is like a,

Key without a lock.

As babies all have had,

A calm peaceful long nap,

In the place where we felt safe,

It is a mother’s lap.

She Taught me human values,

Heard my  first spoken words,

Made me sleep singing a lullaby,

Melodious like chirping of birds.

She is my first and forever friend,

Together we’ve cried and smiled,

No matter how old I am,

For her I’m just her child.

~Krish Kheskani

CRICKET

Stepping on the pitch,

Feeling the bat in your hands,

Looking at the bowler,

Adjusting your stance.

Swinging the bat,

Hitting the ball really fine,

That feeling of satisfaction,

When it crosses the boundary line.

Bowling really fast,

Right onto the stumps,

Shocking the batsman,

Giving him goosebumps.

Scoring a hundred,

Or taking a wicket,

Are all priceless moments,

Of this wonderful game cricket.

A direct throw on the stump,

A spectacular diving catch,

Hitting a six on the last ball,

Winning an important match.

Playing for hours,

In the strong summer heat,

You will find cricket being played,

In every indian street.

~Krish Kheskani

10 A

Experience the greatest teacher of life

The greatest teacher in a person’s life are three people:

Parents, friends and one – himself!

Parents are one of the greatest teachers in life:

They are the people who gave Birth to you, Taught you,

Helped you, Fed you, Worked hard;

Just so you can live a happy life and become successful.

Friends are the ones who help you in problems

When you can’t tell your parents.

A true friend will always help you to become successful.

Then the most important is the one himself!

We ourselves are the greatest teachers in our own life.

If we don’t think positive about ourselves we will never be able to reach our highest potential.

After any problem or difficulty in life we should learn from it.

Instead of thinking about what happened in the past we should think about a successful and bright future.

Shamit Darbari

9 C

The Joy of Giving & Sharing

The Little Alice and Her Dolls

One pleasant evening, little Alice was playing with her dolls in the park. She had a lot of dolls and she loved all of them dearly. Suddenly, she noticed another girl look at her. Alice shouted, “What do you want?”  The girl came to her and requested, “May I please play with your dolls?” Alice replied rudely, “No”. The little girl went away.

Alice’s mother there. Alice told her about the little girl. Her mother said, “Sweetheart, go and call that little girl”. Alice said “But why Mom?” Her mother replied,  “Just go and call her first.”

Alice called that little girl.  Her mother said, “Alice, if you share your things with others, it will help you in becoming more content. Come on, try it out yourself!”

Alice let the other girl play with her toys. The girl was very happy. She hugged Alice and said, “Thank You. Will you be my best friend?” Alice smiled and nodded. She was full of Joy.

Moral: An act of kindness rewards you with great contentment

Bhuvika Nanda

Class IV A

AVM, JUHU