विज्ञानं: वर्त्तमान का प्रतिबिम्ब 

आज का युग विज्ञान का युग है। हमारे जीवन का कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं। प्राचीन काल में असंभव समझे जाने वाले तथ्यों को विज्ञान ने संभव कर दिखाया है। छोटी सी सूई से लेकर आकाश की दूरी नापते हवाई जहाज़ तक सब विज्ञान की देन हैं ।
आज पूरी दुनिया में विज्ञानं की पताका लहरा रही है । जीवन तथा विज्ञान एक दुसरे की पर्याय बन गए हैं । विज्ञान वर्तमान का प्रतिबिम्ब है।
आज मनुष्य विज्ञान की सहायता से उड़ सकता है और मछली की तरह पानी में गहराई तक तैर सकता है। घंटो की दूरी कुछ ही देर में तय हो जाती है और जिस चिट्ठी को पहुँचने में कई दिन लगते थे वो आज मिनटों में पहुँचता है ।
विज्ञान ने कई बड़े क्षेत्रों में सफलता पाई है जैसे सूचना क्रांति, अंतरिक्ष विज्ञान, चिकित्सा आदि। विज्ञान स्वयं में एक शक्ति नहीं, वह मानव की हाथ में आकर शक्ति प्राप्त करीत है । विज्ञान मनो मानव पर निर्भर है ।
विज्ञान सवयं में एक शक्ति नहीं, वह मानव के हाथों में आकर शक्ति प्राप्त करता है । विज्ञान मनो मानव पर निर्भर है । पर हम इनसान कबसे अच्छे बन गए: अगर विज्ञान एक ओरतरक्की का प्रतिबिम्ब दिखा रहा है तोह दूसरी ओर अपनी बुराइयाँ भी ।
गोलाबारूद, बम विस्पोटक, बन्दूक, और अन्य चीज़ों का इस्तेमाल भी विज्ञान की ही देन है   । मानवता की तरक्की और विनाश दोनों का कारण सिर्फ एक है- विज्ञान । उसकी वरदानों से आज मानव, मानव का दुश्मन बन गया है ।
विज्ञान के कल कारखाने तोह बना दिए पर प्रदुषण को हटाया नहीं । विज्ञान ने अस्पताल की सुविधाएं तो दे दी पर बिमारी का कारण भी बन गया । विज्ञान द्वारा सुरक्षा के हथियार तो है पर दूसरों पर हमला करने के लिए उसका इस्तेमाल भी होता है । विज्ञान ने तकनिकी व मनोरंजन की कितनी सुविधायें दीं जिसे घंटो दूर बैठे व्यक्ति से बात तो हो जाती है परन्तु वहीं कमरे मैं बैठे व्यक्ति से नहीं ।
कहा जाता है की हर सिक्के के दो पहलु होते हैं । एक ओर विज्ञान की तरक्की आसमान छू रही है, वहीँ दुसरे ओर मानव जाती के पतन का कारण बन रही है । वह समय दूर नहीं है जब इस विज्ञान के प्रतिबिम्ब में हम सिर्फ एक याद बनकर रह जाएंगे ।
भूमिका मखीजा
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