मिल बाँटकर रहने में सच्चे सुख की अनुभूति

यह सच कहा गया है कि मिल बाँटकर रहने में ही सच्चे सुख की अनुभूति है। दूसरों को खुशी देने से हम स्वयं भी खुश होते हैं और दूसरों को भी खुश कर सकते हैं। निस्वार्थ भाव से हमें दान देना चाहिए। हमें दान करना चाहिए जिससे हमें भी लाभ होता है और हम जिसे दान देते हैं उसे भी लाभ होता है। अगर हमारे पास संपत्ति अधिक मात्रा में हो तो हमें गरीबों तथा ज़रूरतमंदों को दान करना चाहिए।

हमें तुलसीदास जी की यह पंक्तियाँ याद रखनी चाहिए जो है -“तरुवर फल नहीं खात है ,सरवर पियहिं न पान , , कहि रहीम पर काज हित संपत्ति सँचहि सुजान ” | इन पंक्तियों में तुलसीदास जी यह कह रहे हैं कि जो वृक्ष होते हैं वह हमें निस्वार्थ भाव से कई चीज़े देते हैं – जैसे कि छाँव , फल ,पत्ते ,इत्यादि। वृक्ष हमारे लिए प्रदूषित हवा को स्वच्छ भी करते। उसके बाद तुलसीदास जी यह कहतें हैं कि सरोवर हमें पानी देती है जो हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है। फिर तुलसीदास जी कहते हैं जिन व्यक्तियों के पास बहुत संपत्ति  होती है वह लोग गरीबों तथा ज़रूरतमंदों में बाँट देते हैं। इन पंक्तियों से तुलसीदास जी यह दर्शाना चाहते है कि जैसे वृक्ष और सरोवर निस्वार्थ भाव से दान करते हैं और किसी भी चीज़ का मोल नहीं माँगते हैं।

अभी हाल ही में हमने एक उदाहरण देखा कि नीता अम्बानी जी ने मुंबई इंडियन्स की एक पहल शुरू की है जिसमे वह ज़रूरतमंदों तथा गरीबों के बच्चो के शिक्षण के लिए मदद करती हैं। ऐसे कार्य हमें भी करने चाहिए। हमें हमारे जन्मदिन पर आश्रमों में जाकर वहाँ  के अनाथ बच्चो को पुराने कपड़े , खिलोने तथा खाना , इत्यादि चीज़े देनी चाहिए।

हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि खुशी हमेशा देने से बढ़ती है , घटती नहीं। अगर हम दान करके किसी के चेहरे  पर खुशी की मुस्कान ला पाए तो हमें भी ख़ुशी मिलती है।

Swara Shedge (Class 9A)