मिल-बाँटकर रहने में सच्चे सुख सुख की अनुभूति

बहुत समय पहले हस्तपुर नाम के एक राज्य में राम नाम का एक व्यापारी था। वह एक छोटी सी झोपडी में अपनी पत्नी और दो बच्चों के रहता था , एवं उसका परिवार गरीबी का शिकार बन गया। वह अपना गुज़ारा ऊँचे कुल की सेवा कर कर लेता था। वह श्याम सेठ के यहाँ सफाई का इंतज़ाम और केशव महाराज के घर सफाई का काम करता था।  धन की कमी के कारण वह अपने बच्चों को विद्यालय भी नहीं भेज पाता | उसकी पत्नी हर रोज़ केवल एक रोटी एवं कुछ अनाज पकाती और रामु एयर उसके बच्चों का दिन का भोजन समाप्त हो जाता |

राज्य के राजा भीमसिंह एवं उनकी पत्नी कुशला विनम्रता एवं अपनी विद्या के लिए प्रसिद्ध  थे |

एक दिन राजा ने राज्य को भीतर से परखने का इरादा किया; उन्होंने  एक साधु  का रूप धारण कर लिया एवं राज्य में अपने मंत्री के साथ रात को घूमने चले | उस रात राम केशव महाराज के ही काम कर अपनी झोपडी में लौटा था एवं उसकी पत्नी ने खाना तैयार  कर लिया था | तभी दरवाज़े पर किसी के खटखटाने की आवाज़ आई। राम ने दरवाज़ा खोला तो एक बूढ़ा  साधू बाहर  खड़ा था। साधू ने धीमे स्वर में कहा , “भाई , कुछ खाने को देदो ।” राम ने कुछ देर तक विचार दिया और कहा , “ठीक है , आप हमारे साथ भोजन कर सकते  है।” राजा  राम के परिवार के साथ भोजन किया और चुप-चाप उसके घर से महल की ओर चल दिए।

अगले दिन राजा ने राम को दरबार में बुलाया एवं उसे इनाम के तौर पर कुछ सोने के सिक्के देते हुए कहा , “अन्न की कमी होने पर भी तुमने कल रात मुझे अपने  घर में भोजन करने की अनुमति दी ,मैं बहुत प्रसन्न हुआ हूँ।” यह सुनकर राम के मन खिल उठा ।

– प्रमर्थ कैप्टन

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