मिल-बाँटकर रहने में सच्चे सुख की अनुभूति

मिल-बाँटकर जीना श्रेष्ठ है। हमें सब लोगों की सहायता करनी चाहिए और हमें यह उम्मीद नहीं रखनी चाहिए कि हमारे अच्छे कार्यो के बदले  हमें कुछ मिलेगा।

मिल-बाँटकर रहने में ही सच्चे सुख की अनुभूति मिल-बाँटकर जीना श्रेष्ठ है। हमें सब लोगों की सहायता करनी चाहिए और हमें यह उम्मीद नहीं रकनि चाहिए की हमारे अच्छे कार्यो के बदले  हमें कुछ मिलेगा।हमें भी इस बात का एहसास होना चाहिए की हम जो भी दान या अच्छे कर्म कर रहे हैं वह बस किसी की सहायता के लिए है। हमें अपने लाभ के लिए किसी की सहायता नहीं करनी चाहिए। हमें सबके साथ मिल-बाँटकर रहना चाहिए , सच्चे सुख की अनुभूति मिल-बाँटकर रहने से ही होती है। जो लोग कोई भी कार्य अपने लाभ के लिए करते हैं उन्हें कभी सुख प्राप्त नहीं होता लेकिन वह सफल तो होते हैं , उनके पास दुनिया की कोई भी चीज़ हो सकती है लेकिन उनके जीवन में सुख नहीं प्राप्त हो पाता है।

कई बार जब भी हम किसी की सहायता या मदद करने जाते हैं , हमारे दिमाग में हम कहीं न कहीं तो सोच रहे होते हैं की हमारे इस कार्य के लिए हमें कुछ तो मिलेगा पर हमें सबसे पहले हमारी  सोच को बदलना चाहिए , उसके बाद हमें सुख का एहसास होगा जब हम किसी को सहायता करेंगे।

अपने लाभ के लिए कोई कार्य नहीं करना चाहिए , दूसरे की भलाई का सबसे पहले ध्यान रखना चाहिए।

तविश्का मिश्रा

(9-A)

AVM JUHU