भूत – भविष्य के लिए एक सबक

हम एक असाधारण अपूर्व स्थिति या पल को ऐतिहासिक अर्थात् इतिहासपरक क्यों कहते हैं? क्योंकि वह कभी भुला नहीं जा सकता। इतिहास हमारे रग-रग में बसता है और उसके कारण हमारा वर्तमान सार्थक और सफल होता है।

 हमारे कार्य जो हमने भूत में किए , उनका फल हमें भविष्य में मिलेगा और हमारे वर्तमान के कर्मों का फल जो जल्द ही भूत बन जाऐगा, भविष्य में ही प्राप्त होगा। भविष्य निर्माण में अतीत का योगदान बहमूल्य है और इसके कारण निश्चित है। इतिहास का अध्ययन करने से अतित की गलतियौ, दोषों औरकमियों को दोहराने से बचने के लिए अतीत को ध्यान में रखना और समझना अत्यंत महत्वपूण है। हमारी प्रगति और उन्नति विश्लेषण करने हेतु वे कहाँ थे और हम कहाँ थे जनना अनिवार्य है। हम अपने  पूर्वजों की महान सिध्दियों और परिपूर्ति से अपने संपूर्ण जीवन के लिए सबक समझकर भविष्य में हीरों की तरह उज्जवल हो सकते हैं। अच्छी चीजें ही नहीं मगर हमारे पूर्वजों की निराशाजनक विफलताओं को भी जानकर सुनिश्रित कर सकते है कि वर्तमान में फिर ना दोहराएँ अतः इतिहास का अध्ययन हमारे भविष्य का निर्णायक है ताकि हमें उचित और अनुचित का ज्ञान हो और हमारा वर्तमान उनके सिखाए मार्ग पर चलने से सफल हो। जरा सोचिए अगर हमें अतीत की जानकारी होती ही नहीं तो क्या हमारे पास वर्तमान होता?

     अगर हमें अपने पूर्वजों की कङी मेहनत और बलिदान का ज्ञान न होती तो उनकी महान उपलब्धियों और कठिनाइयों से हम ना ही कुछ सीख पाते और उनका सम्मान भी मजबूरन ही करते। सबसे बड़ा उदाहरण पाकिस्तान का है। अगरर हम इतिहास का अध्ययन नहीं केंरगे तो हम दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा तो दूर, नैतिक मूल्यों को भी धारण नहीं कर पाएँगे। हमें अपने देश, संस्कृति और परम्पराओं पर गर्व करना चाहिए और इतिहास यह करे में हमोरी सबसे ज्यादा सहायता करता है। हमारा व्यक्तिगत जीवन भी अतीत से जुड़ा हुआ ।

हमारे इतिहास को समझकर और भविष्य परखकर हम एक निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि जहाँ हम है और जहाँ होगे सब इतिहास से प्रभावित है। भविष्य को परखकर हम पुरानी परम्पराओं से कार्य पूर्ण कर सकते हैं जो  हमारे भविष्य को सुनहरा बनाऐंगी। और जैसा हम अपना भविष्य चाहते है, वैसा पा कर हम अपना व अपने देश का भविष्य ऐसा बनाएँगे कि दुनिया गर्व करेगी।

 इतिहास को ऐतिहासिक मत बनाऔ!   हमारे भूत को गलती से भी भुलाने की भूल   मत दोहरा

    – कशिश जुमानी

         IX सी