भूटान

इस साल के मई के महीने में मुझे भारत के पड़ोसी देश, खूबसूरत भूटान जाने का मौका
मिला. भूटान हिमालय पर बसा दक्षिण एशिया का एक छोटा और महत्वपूर्ण देश है. भूटान
दुनिया के उन कुछ देशों में से है जो खुद को शेष संसार से अलग रखता चला आ रहा है.
भूटान की ज़्यादातर आबादी छोटे गांव में रहती है और कृषि पर निर्भर है. बौध विचार यहाँ
की ज़िंदगी का अहम हिस्सा है. तीरंदाजी यहाँ का राष्ट्रीय खेल है.
मेरे यात्रा के कार्यक्रम में भूटान डाकघर, फुनाखा निलंबन पुल और टाइगर नेस्ट था. टाइगर
नेस्ट, भूटान के सबसे पवित्र और अद्भुत बौध स्थलों में से एक है. टाइगर नेस्ट ३००० मीटर
ऊँची चट्टान पर बना है. टाइगर नेस्ट को १६९२ में बनाया गया था. भूटान की राजधानी
थिंपू से कुछ घंटों की दूरी पर यह मोनॅस्ट्री स्थापित है. टाइगर नेस्ट मेरे लिए मुख्य
आकर्षण था. यात्रीगण पैदल यात्रा करके इस नेस्ट तक पंहूचते हैं और हमें भी हमारे गाइड ने
पूरी तरह से तैयार होकर आने की सलाह दी थी. कुछ लोग इस यात्रा को मध्य भाग तक
घोड़े पर सवार होकर तय करते हैं. किंतु हमने यह तय किया था की हम पैदल ही इस यात्रा
को संपूर्ण करेंगे. हम सब सुबह ८ बजे तैयार होकर यात्रा आरम्भ स्थल पर पंहुच गये. हम
सब बहुत खुश और उत्साहित थे. हमारे गाइड ने कहा था की यह यात्रा लगभग ६ घंटो में
पूरी की जा सकती है. मैंने बहुत जोश और मनोबल से चढ़ना आरम्भ किया. जैसे-जैसे उपर
चढ़ती गई, वैसे ही थकावट बढ़ती गई. मेरे पिताजी ने रह रह कर यह याद दिलाया कि हमें
हर हाल में साहस बनाए रखना है और अपने पैरों के सहारे टाइगर नेस्ट पहुँचना है. यह
सुनकर मेरा मनोबल बना रहा और मैं यात्रा में आगे बढ़ती चली गई. मेरे पिताजी अपने
कैमरे से अच्छी दृश्यों की छवि उतारते रहे. जब यात्रा के मध्य भाग से टाइगर नेस्ट केवल
एक लघु मात्रा में दिख रहा था, इससे यह समझ में आया कि यात्रा आगे और भी कठिन है.
हाँफते हाँफते मैं टाइगर नेस्ट किसी तरह से पंहुच गई. मेरी खुशी के ठिकाने नहीं रहे जब
वहाँ का सुंदर दृश्या देखा. हम सब अपनी थकावट भूल गये और पूरा मोनॅस्ट्री घूम कर
अच्छी तरह से देखा.
भूटान की संस्कृति और उनका धर्म स्थल वास्तव में बहुत सुंदर लगा. हमने इस अवसर का
भरपूर लुफ्त उठाया और बहुत ज्ञान अर्जित किया.

मुग्धा मोहंती
कक्षा ६
बांद्रा पूर्व