परिवर्तन

जीवन हमेशा एक-सा नहीं रहता, परिवर्तन को स्वीकार करना चाहिये ।

परिवर्तन ही जीवन है।

परिवर्तन को स्वीकार कर ही हम अपनी हताशा-निराशा से उबर सकते हैं और समय के साथ चलकर अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं।

परिवर्तन प्रकृति का नियम है। हम प्रकृति के इस नियम को जब भी मानने से इनकार करने लगते हैं, तब हम दुखी होते हैं, अवसाद से घिर जाते हैं।

हमें समझना होगा कि जब अच्छे दिन हमेशा नहीं रहते, तो बुरे दिन भी हमेशा नहीं रहेंगे।

जो व्यक्ति इस सत्य को जान लेता है, वह कभी निराश-हताश नहीं होता।

परिवर्तन को स्वीकारना हमें गतिशील बना सकता है।

जीवन का आनंद हम तभी उठा सकते हैं, जब हम समय के साथ चलें।

समय के साथ वस्तु, विषय और विचार बदलते हैं। मनुष्य की स्थितियां बदलती हैं।

इसलिए हमारे विकास के लिए हमें बदलाव को स्वीकारना चाहिये ।

परिवर्तन ही जीवन में नए उत्साह और नए साहस की लहर लाता है।

आज से हम जीवन में आए परिवर्तनों को स्वीकारें और जीवन के स्वाद का पूरा आनंद लें।

कश्यप खण्डेलवाल

कक्षा पाचवी

Arya Vidya Mandir Bandra(East)