जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक- मेरी माँ

     वैसे तो हमारे जीवन में बहुत सारे शिक्षक- शिक्षिकाएँ होतें हैं, जो विद्यालय एवं महाविद्यालय में हमें बहुत सारे भिन्न-भिन्न विषयों पर विद्या प्रदान करतें हैं और हमें बहुत सारा ज्ञान प्राप्त होता है, जिसके कारण हम अपने अपनी परीक्षाओं में उत्तम अंक प्राप्त कर सफलता की ऊँचाइयाँ छूते हैं| किन्तु हमारे जीवन की सबसे महत्त्वपूर्ण शिक्षिका हमारी माँ होती है| वह हमारी माँ ही है, जो हमें जीना सिखाती है और हमें पाल-पोसकर बड़ा, सशक्त, स्वावलंबी एवं सफल बनाती है|

     जन्म देने से वृद्ध होने तक हमारी माता हमारे साथ रहती है| बचपन में जब हम छोटे होते है, हमारी माँ ही हमें हाथ थामकर चलना सिखाती है| जब भी हमें चोट लगती है, तो सबसे अधिक चिंतित हमारी माँ ही होती है; किन्तु निर्बल होने के बजाय हमें कठिनाइयों से लड़ कर उठ खड़े होना सिखाती है| जब भी हमारा सामना असफलता से हो जाता है, तो माँ ही हमें सांत्वना देकर हमें परिश्रम करना और जीवन में आगे बढ़ना सिखाती है|  भले ही हमारे पिता कभी-कभी काम में व्यस्त होकर हम पर उतना ध्यान नहीं देते, किन्तु माँ पूरे घर को चलाने के साथ-साथ हमारा पूरा ख्याल रखती है| बड़े होने पर भी, हम जब कभी भी राह से भटक जाते हैं और अनुचित कार्यों में लग जातें हैं, तो माँ किसी भी प्रकार से हमें उचित मार्ग पर ले आती ही है और हमें सुधारती है|

     अतः माँ ही जीवन में हमारी सबसे बड़ी शिक्षक होती है जो हमें जीवन में बहुत कुछ सिखाती है और हमारा जीवन पूर्णतः सिद्ध एवं धन्य बनाती है| ऐसी उच्च देव-निर्मिती को मेरा सदैव चरण-वंदन रहेगा|

 लेखिका – सृष्टि  गुप्ता

कक्षा: ९ ‘B’