गणेशजी का चूहा

कैलाश की चोटी पर, शिवजी के आलय में गणेश जी रहते थे। उनकी मां पार्वती जी का भी यही निवास था। वे सब खुशी खुशी अपना जीवन व्यतीत करते थे। वहीं दूसरी तरफ, गजमुखासुर नाम का एक असुर शिवजी को प्रसन्न करने की कोशिश कर रहा था। वह कठिन तपस्या से भूख, प्यास, सूर्य और हवा की कठोर परीक्षा को जीत चुका था।
जब शिवजी उसके सामने प्रकट हुए तो उन्होंने उसे यह वरदान दिया कि नाही मनुष्य और नाहीं जानवर उसका वध कर सकते है। यह वरदान पाकर गजमुखासुर घमंडी हो गया। उसने पास के गाँव में आतंक कर दिया। उसने लोगों के घरों को बरबाद कर दिया ओर अब तो वह देवताओं के पास जा रहा था। वरदान की वजह से कोई देवता भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता था। सब देवता शिवजी के पास गए और उनसे प्राथना की के वह उनकी सहायता करें। शिवजी जानते थे कि पूरे विश्व में सिर्फ गणेश जी ही गजमुखासुर का वध कर सकते है। अतः गणेश जी गजमुख के पास गए और उसे युद्ध के लिए ललकारा। जब गजमुखासुर को पता चला कि गणेश जी मनुष्य ओर जानवर के मिश्रण थे तो वह ङर गया और भागने लगा। पर गणेश जी ने उसे पकड़ लिया और अपनी शक्तियों से उसे चूहा बना दिया। उस दिन से गजमुखासुर एक चूहा बन गया और गणेश जी का वाहन।

By Priya Misra, Class 7A, AVMBW