खुशी हम पर निर्भर होती है

“बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना मुझसे बुरा न कोय।।”
कबीर जी के इस दोहे में कितनी गहराई और सच्चाई है। बुराई और दुख हमारे देखने के नजरिए में होती है ,हमारी नासमझी होती है। हमारी सोच ही हमारा निर्माण करती है।
खुशमिजाज व्यक्ति सबको आकर्षित करते हैं। खुश रहने का गुण परमात्मा की देन होती है। वे सकारात्मक, निस्वार्थ और विनीत होते हैं। उनकी खुशी दूसरों को खुश करने से दुगनी हो जाती है। वे इतनी आसानी से निराश या चिंतित नहीं होते। मुश्किलों का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और सफलता हासिल कर सकते हैं।
खुशी एक तितली की तरह होती है। जैसे तितली जहां जाती है, वहां अपनी सुंदरता से सबको खुश कर देती है। मनुष्य को अपने जीवन के हर स्थिति में खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए। खुशी जीवन में तथा उमंग भर देती है। जीवन को सफल बना देती है।
खुश हर कोई रहना चाहता है। बल्कि हमारे जीवन का उद्देश्य ही खुशी से जीना है। हर कोई अपने सामयिक प्रसन्नता पैसे, महत्वकांक्षा, रिश्ते आदि से जोड़ लेता है। यदि यह सब हासिल ना कर सके, तो निराश वह दुखी हो जाता है।
सच्ची खुशी सिर्फ ज्ञानियों की पूंजी होती है। हम स्वयं ही अपनी खुशी के लिए जिम्मेदार होते हैं। खुशी हमारे भीतर होती है जो हमारे नजरिए और सोच से जन्म लेती है, हमारे निर्णय का परिणाम होता है।
खुश रहने का यह मतलब नहीं कि हम हर वक्त हंसते – मुस्कुराते रहे। सच्ची खुशी एक भावना होती है जो हमारे दिल में खिल उठती है, जब हम कुछ अच्छा करते हैं। हम परेशानी की स्थिति में भी नकारात्मक को सकारात्मक में बदलकर समस्या का उत्तर पा सकते हैं। और खुशी बरकरार रख सकते हैं। मूर्ख और नकारात्मक लोगों का साथ हमेशा के लिए खुशी को हमारे जीवन से काफूर करता है। इसीलिए कहते हैं खुशी हमारे हाथ में ही होती है। वह हालातों पर नहीं हमारे विकल्पों पर निर्भर होती है। हमारे परीक्षा में भी कहा जाता है – “सही विकल्प चुनिए”।
खुशी हमारा अधिकार है। खुशी जैसे कोई खुराक नहीं। इसे अपने अंदर ही खोजना, दोस्तों।
Aarav Masrani
STD 8 C
AVM BE