अनुभव जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक है

‘बैठने वाले का भाग्य बैठ जाता है और खड़े होने वाले का भाग्य खड़ा हो जाता है।’ अर्थात जो अपने पैरों पर खड़ा होकर चीज़ों को अनुभव करता है वही सबसे आगे होता है। जोलोग किसी परिस्थिति का सामना करने से डरते है और अनुभव करने से पीछे हट जाते है वे अपने जीवन में कुछ अच्छा कार्य करने का अवसर खोते है और पीछे रह जाते है।

कोई  भी अवसर दोबारा नहीं आता है जैसे बीता हुआ समय लौट नहीं सकता। हमारा अनुभव हमें बहुत कुछ सिखाता है। अगर हमें किसी भी कार्य में सफल होना है और हमबहुत मेहनत करके उस कार्य को पूर्ण करते है पर फिर भी हम असफल रहे तो हार मानना उचित नहीं है। इस अनुभव से हमें कुछ सीखना चाहिए। क्या और करना चाहिए थाऔर क्या गलत था यह सब विष्लेषण करके हमें पुनः अपनी जान से भी अधिक प्रयत्न करके उस कार्य को पूर्ण करना चाहिए। इस समय तो हम सफलता प्राप्त कर सकते है।एसी परिस्थिति में अनुभव हमें अपनी गलतियों का एहसास करके परिश्रम करना सिखाता है क्योंकि सही समय पर हमें परिश्रम का फल ज़रूर मिलता है। इसलिए हम कहते हैंकी बुज़ुर्गो का आदर करना चाहिए। वे हमसे अधिक अनुभवी है। हमें उनकी बातों को मानकर अपने जीवन में उन नैतिक मूल्यों का उपयोग करना चाहिए जो उन्होंने सीखा हैताकि हम अपने जीवन को बेहतर कर सके । एक व्यक्ति जो अपने जीवन में अनुभव करने से डरता है वह अपने वास्तविक मृत्यु से पहले कई बार मरना माना जाता है। यहऐसा है क्योंकि वह डर एक व्यक्ति में तब तक रहता है जब तक वह उस परिस्थिति को अनुभव नहीं करता। ‘डर के आगे जीत है’ आपने यह पंक्ति सुनी ही होगी। डर एक ऐसीचीज़ है जो अपने जीवन में बाधा बनकर आती है। डर हमें बहुत सारे कार्यो को करने से रोकता है। अगर हम डर को मिटाकर परिस्थिति को अनुभव करना शुरू करते है तोहम एक बेहतर मनुष्य बन सकते है।

आखिर में अनुभव हमें एक बेहतर मनुष्य बनना सिखाता है। हम अनुभव से अपना जीवन सुधार सकते हैं। इसलिए हम कहते है ,”अनुभव जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक है।”

Kavya Rao ( 9C)

AVM JUHU